27 जुलाई को कन्या लग्न से पहले भद्रा
27 जुलाई को श्रावणशुक्ल सप्तमी तिथि सोमवार को 9 घटी 1 पल है। चित्रा नक्षत्र 20 घटी 46 पल है। बाद में स्वाति है। सूर्योदय से 9 घटी 1 पल तक मुद्गर योग है। इससे सूर्योदय से 5 घटी छोड़नी होगी। उसके बाद 4 घटी शेष रहेगी, क्योंकि 9 घटी 1 पल के बाद भद्रा है। भद्रा में मुहूर्त नहीं मिलता। 5 घटी के बाद 9 घटी तक की जो 4 घटी है, उसमें सिंह लग्न मिलेगा।
सिंह लग्न में लग्नेश सूर्य लग्न से द्वादश में और चतुर्थेश एवं नवमेश मंगल अष्टम में रहेगा। इसलिए यह मुहूर्त नहीं हो सकता। कन्या लग्न आने से पहले भद्रा आती है। जो 35 घटी 57 पल तक है। भद्रा समाप्त होने पर रात्रि में स्थिर लग्न कुंभ मिलेगा। कुंभ लग्न लेने पर लग्नेश शनि द्वादश में रहेगा।मुहूर्त पारिजात में लिखा है- “लग्न - 2,3,5,6,9,12 राशि एवं शुभग्रह दृष्ट - युतलग्न।” इसमें 11 संख्या नहीं है।
अतः कुंभ लग्न परिगणित नहीं है। तदनुसार रात्रि में कुंभ लग्न में मुहूर्त नहीं मिलेगा। रात्रि में 9-21 के बाद मीन लग्न आएगा। उसमें लग्न में पापग्रह मंगल बैठा है और लग्न से अष्टम में चन्द्र रहेगा। इसलिए मीन लग्न नहीं लिया जा सकता। उस दिन सुबह चित्रा नक्षत्र में वृषवास्तुचक्रानुसार नक्षत्रशुद्धि नहीं मिलती। अतः 27 जुलाई 2020 को मन्दिर निर्माण के लिए मुहूर्त नहीं है।
राम मंदिर का प्रस्तावित मॉडल
- फोटो : अमर उजाला
29 जुलाई को सार संग्रह अनुसार राजभय
29 जुलाई को श्रावण शुक्ल 10 बुधवार धातृयोग है। इस दिन विशाखा 12 घटी 58 पल है। बाद में अनुराधा है। विशाखा विहित नक्षत्र न होने से उसमें निर्माणारम्भ नहीं हो सकता। सिंह लग्न में विशाखा रहेगी। कन्या लग्न में अनुराधा रहेगी। उस समय अग्निबाण रहेगा। बाद में तुलालग्न चर होगा। 1-34 के बाद वृश्चिक लग्न में अष्टम में राहु के होने से अष्टमशुद्धि नहीं रहेगी। लग्नस्थ चन्द्र का दोष रहेगा।
3-51 के बाद धनुर्लग्न आएगा जो पापाक्रान्त है। उसमें अष्टमशुद्धि नहीं मिलेगी। अष्टम में सूर्य, बुध रहेंगे। द्वादश भाव में चन्द्र जायेगा। अतः धनु र्लग्न को नहीं लिया जा सकता। रात्रि में कुंभ लग्न में लग्नेश शनि द्वादश में होगा। अतः उसे नहीं ले सकते। रात्रि में 9-13 के बाद मीनलग्न आएगा। वह पापाक्रान्त है।
अतः उसे नहीं लिया जायेगा। संपूर्ण दिन में दशमी होने से उसमें मन्दिर प्रारम्भ करने पर मुहूर्तपारिजातोद्धृत “दशम्यां तु नृपाद् भयम्” इस ज्योतिः सारसंग्रहवचनानुसार राजभय होगा। इससे 29 जुलाई को मन्दिर निर्माण मुहूर्त नहीं है।
विहिप का राम मंदिर मॉडल।
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30 जुलाई को विघटन और अशुभ की आशंका
30 जुलाई को श्रावण शुक्ल 11 गुरुवार है। 9 घटी 42 अनुराधा है। उसके बाद ज्येष्ठा है। 9-42 बजे तक अनुराधा है। 9 बजे तक सिंह लग्न रहेगा। उसे लेने पर लग्नेश सूर्य द्वादश में और अष्टम में मंगल जाएंगे। अतः सिंह लग्न नहीं लिया जायेगा।
कन्या लग्न में प्रथम नवांश मकर का होगा। उसे लेने पर चरांश लेने का दोष होगा। कुंभ नवांश पाप नवांश होने से अग्राह्य है। कुंभ नवांश प्रारंभ होने पर ज्येष्ठा नक्षत्र आएगा जो अग्राह्य है। साथ ही एकादशी तिथि होने से मुहूर्तपारिजातोद्धृत “एकादश्यां विघट्टनम्” इस ज्योतिःसारसंग्रहवचन के अनुसार विघटन होगा जो अशुभ है। इस प्रकार 30 जुलाई को मंदिर निर्माण मुहूर्त नहीं है।
राम मंदिर के लिए तराशे गए पत्थर
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3 अगस्त को अष्टम शुद्धि नहीं, लग्नेश सूर्य द्वादश में
3 अगस्त को श्रावण शुक्ल पूर्णिमा सोमवार है। इस दिन 7 घटी 37 पल भद्रा है। उत्तराषाढा 5 घटी 20 पल है। बाद में श्रवण है। भद्रा के पश्चात् सिंह लग्न के छोर में मीन नवांश को लेने पर सिंह लग्न से षष्ठ में चन्द्र आएगा। मुहूर्तपारिजात में कहा है - “तथा चन्द्रमा 1, 6, 8, 12वें भाव में न हो।” इसके अनुसार सिंह लग्न नहीं ले सकते।
सिंह लग्न में लग्न से अष्टम में मंगल है। अतः अष्टम शुद्धि नहीं है। साथ ही लग्नेश सूर्य द्वादश में जायेगा जो अशुभ है। कन्या लग्न में और वृश्चिक लग्न, धनुर्लग्न एवं कुंभ लग्न में पौर्णमासी तिथि का दोष है। रात्रि में 8-53 बजे के बाद मीनलग्न में लग्न पापाक्रान्त है। उस समय भाद्रपदकृष्ण प्रतिपदा है। इस प्रकार ३ अगस्त को भी मंदिर निर्माण मुहूर्त नहीं मिल रहा है।
5 अगस्त को ही शिलान्यास सर्वाधिक उपयुक्त
आचार्य ने साफ किया कि 5 अगस्त को कन्यालग्न की जगह तुलालग्न में शिलान्यास होना चाहिए। उस दिन पूर्णिमान्त भाद्रपद कृष्ण और अमान्त श्रावण कृष्ण द्वितीया बुधवार है। सुबह धनिष्ठा नक्षत्र है। अनन्तर शततारका नक्षत्र है। कन्या लग्न में लग्न से षष्ठ स्थान में (कुम्भ में) चन्द्र है और केन्द्र में पापग्रह (मंगल, राहु, शनि, केतु) हैं। मुहूर्त पारिजात में कहा है “लग्न – 2, 3, 5, 6, 9, 12 राशि और शुभग्रह दृष्ट – युत लग्न।
जब 3, 6, 11वें भाव में पापग्रह हों, शुभग्रह 8, 12वें भाव के सिवा अन्यत्र हों, दशम भाव में सबल सौम्य ग्रह हों और चन्द्रमा 1, 6, 8, 12वें भाव में न हो।” इसके साथ ही ज्योतिर्विदाभरण में कहा है कि यदि गृहारम्भ के समय सप्तम भाव दुष्ट ग्रह से युक्त हो तो अहंकार के अभ्युदय से गृहकलह होता है।
कन्या लग्न में लग्न से सप्तम में मंगल के होने से ज्योतिर्विदाभरणानुसार कलहकारक होने से 5 अगस्त को कन्यालग्न का मुहूर्त नहीं दिया गया है। उस दिन मन्दिर निर्माण के मुहूर्त के लिए तुलालग्न दिया गया है। आचार्य ने 5 अगस्त को भूशयन, चन्द्र का पाताल निवास, षोडशवर्ग आदि पर भी स्थिति स्पष्ट की।