जयरामपुर गांव में नौ दिवसीय श्रीरामचरितमानस कथा में सोमवार को पंचवटी के स्वामी अचलानंद महाराज ने संपूर्ण रामचरितमानस की रचना में माताओं के विशेष योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मां तुलसी की कृपा से तुलसी का प्राकट्य हुआ। देवी रत्नावली की कृपा से बाबा तुलसीदास बने। मां कौशल्या और सतरूपा की कृपा से बालकांड, कैकेयी से अयोध्या कांड और शबरी की कृपा से अरण्यकांड की सुमधुर रचना संभव हुई। भगवान द्वारा पुत्र रूप में अवतरित होने के वरदान की भावपूर्ण वर्णन किया। अंत में सीताराम नाम के भजन से पूरा पंडाल राममय हो गया। श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। आरती एवं प्रसाद वितरण हुआ। यजमान रंगीले मिश्र, सुंदरम मिश्र, पवन चौबे आदि रहे।