लक्सा क्षेत्र के एक मॉल का गृहकर 11 लाख रुपये से घटाकर सात लाख करने के मामले में कार्रवाई का इंतजार हो रहा है। एक ओर नगर निगम शहर में बड़े बकाएदारों पर कार्रवाई कर रहा है। कुर्की और बैंक खाते सीज करने के दौरान बड़े बकाएदारों पर शिकंजा लगातार कसा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर निगम के ही अधिकारी बड़े लोगों का गृहकर घटा रहे हैं। खुद नगर निगम की रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया गया है।
जिस समय यह मामला उजागर हुआ था। उस दौरान जोनल अधिकारी राजेश अग्रवाल रहे। इनको हटाकर तत्कालीन नगर आयुक्त शिपू गिरि ने अपर नगर आयुक्त राजीव कुमार राय को जांच सौंपी थी। जोनल अधिकारी पद से हटने के बाद भी उन्हें विज्ञापन, लाइसेंस और परिषद का काम दिया गया है। अपर नगर आयुक्त की जांच रिपोर्ट में उन्होंने कार्रवाई के साथ जीआईएस केआधार पर नए सिरे से गृहकर तय करने की सिफारिश की थी। इसके बाद मुख्य कर निर्धारण अधिकारी असीम रंजन ने घटाए गए गृहकर को सात लाख से बढ़ाकर 9.77 लाख किया था। जांच अधिकारी राजीव कुमार राय ने कहा कि मैंने अपनी रिपोर्ट भेज दी थी। आगे की मुझे जानकारी नहीं है। निगम में गृहकर से जुड़े मामलों की बेहतर ढंग से जांच की जाए तो कई ऐसे चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। ज्यादातार बड़े होटलों, लॉज, माल, हास्पिटल, नर्सिंग होम, शोरूम आदि के गृहकर घटाने के मामले सामने आएंगे। इनमें पूरा सिंडिकेट लगा है। इसका खामियाजा आम जनता को उठाना पड़ता है।