हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार शर्मा शास्त्री कहते हैं कि प्रकृति हमेशा से अपने अद्भुत नजारों के कारण कौतूहल का केंद्र रही है। प्रकृति के यही रूप कवियों को आकर्षित करते हैं। कवियों की दुनिया में जो चंदा मामा दूर के थे आज पास आ गए हैं।
संस्कृत काल से लेकर आज तक प्रकृति के ये बदलाव साहित्य में दिख रहे हैं। इसको देखने के लिए क्षेत्र के लोग आकाश की ओर टकटकी लगाए रहे। कई लोगों ने इस पल को अपने मोबाइल फोन में कैद कर लिया। लोग अपने घरों के छत सहित सड़क आदि जगहों से इसे देखते नजर आए।