बीएचयू के संस्कृत विद्या एवं धर्म विज्ञान संकाय के ज्योतिष विभाग में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वक्ताओं ने ज्योतिष की महत्ता से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा की। बतौर मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र का जीवन में बहुत उपयोग है। जन्म से लेकर मृत्यु पर्यंत जो भी क्रियाकलाप होते हैं, वह ज्योतिष के आधार पर ही निर्धारित हैं।
समारोह में सीमा द्विवेदी ने कहा कि ज्योतिष सफल जीवन का मार्ग प्रशस्त करता है। जीवन में सनातन धर्म के अनुसार लक्ष्य प्राप्ति का भी यही सबसे बड़ा साधन है। यहीं नहीं जो भी कमियां होती हैं, उसे दूर करने का उपाय भी हमें ज्योतिष विद्या में ही मिलता है। नेपाल के अर्जुन प्रसाद वास्तोला ने ज्योतिष एवं पंचांग की प्रशंसा कर मुहूर्तादि को सनातन परंपरा का आधार बताया। उन्होंने पंचांगों की एकरूपता की बात कही।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि वेद विहित यज्ञों का आधार ज्योतिष है और ज्योतिष का आधार काल है। वेद को सम्यक् प्रकार से जानने हेतु वेदांगों के माध्यम से ही समझा जा सकता है। संकाय प्रमुख प्रो. कमलेश झा ने कहा कि प्रज्ज्वलित अग्नि में आहुति वैदिक या तांत्रिक प्रयोग का आधार सर्वतोभावेन ज्योतिष ही है। स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. गिरिजा शंकर त्रिपाठी, धन्यवाद ज्ञापन प्रो. विनय कुमार पांडेय ने किया। इस दौरान प्रो. रामचंद्र पांडेय प्रो. सर्वनारायण झा, प्रो. उमाशंकर शुक्ल मौजूद रहे।
ज्योतिषमणि माला, मुहूर्ततचिंतामणि का लोकार्पण
पहले दिन प्रो. गिरिजाशंकर शास्त्री द्वारा कनाडा से प्रकाशित, संपादित ग्रन्थ ‘ज्योतिष मणि माला’ और डॉ. सुभाष पांडेय द्वारा संपादित ग्रंथ ‘‘मुहूर्त्तचिन्तामणि’’ का लोकार्पण अतिथियों ने किया। अतिथियों ने दोनों विद्वानों के इस प्रयास की सराहना की।