सूचना के आधार पर थाना प्रभारी रामनगर ने सूजाबाद चौकी इंचार्ज आशीष मिश्रा के साथ संतोष के घर की घेराबंदी की। दरवाजा खटखटाने पर आरोपियों ने बच्चे को जान से मारने की धमकी दी। पुलिस सख्ती से पेश आई तो कुछ देर बाद आरोपियों ने दरवाजा खोल दिया। बच्चे के साथ विवेक और ऋषभ पकड़े गए, जबकि सोनू चकमा देकर भागने में सफल रहा।
बच्चा पहचानता था, इसलिए विरोध नहीं किया
पूछताछ में सामने आया कि प्रकाश के घर आने-जाने के कारण सोनू उनके परिवार के सभी सदस्यों से घुला-मिला था। प्रकाश की अच्छी आर्थिक स्थिति देख उसके मन में लालच आया। इस पर सोनू ने अपने दोस्त विवेक और ऋषभ को तगड़ी रकम देने का वादा कर अपनी योजना में शामिल किया। सोमवार की दोपहर बाद कार्तिक को उसके घर के समीप से बहला-फुसला कर सोनू उसे चंदौली ले गया। इसके बाद तीनों उसे लेकर सूजाबाद चले गए। सोनू को पहचानने के कारण कार्तिक विरोध नहीं किया। घर के बारे में पूछने पर सोनू बार-बार कह रहा था कि जल्द ही चलेंगे।
मकान मालिक और पुलिस का जताया आभार
कार्तिक को लेने के लिए उसके परिवार के लोग सभी रामनगर थाने आए थे। मां मीरा देवी जैसे ही अपने कलेजे के टुकड़े को देखीं तो फफक कर रोने लगीं। परिजनों ने बताया कि कार्तिक तीन बहनों का छोटा भाई है। कार्तिक के परिजनों ने मकान मालिक संतोष तिवारी और रामनगर थाने की पुलिस का आभार जताया। सभी ने कहा कि विश्वासघात कर मासूम का अपहरण करने वाले सोनू को पकड़ कर पुलिस कड़ी से कड़ी सजा दिलाए।