कोर्ट परिसर के बाहर खुशी मनाता हिंदू पक्ष
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ताकि, यह पता लगाया जा सके कि क्या मौजूदा संरचना का निर्माण पहले से मौजूद मंदिर के ऊपर किया गया है। एएसआई के निदेशक वादी, प्रतिवादी और उनके वकीलों से वैज्ञानिक जांच के संबंध में बात करें और फिर सर्वे करके रिपोर्ट चार अगस्त तक अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें। सर्वे की कार्रवाई की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई जाए। मौजूदा निर्माण की प्रकृति, आयु का निर्धारण करने के लिए अन्य वैज्ञानिक तरीकों का संचालन करने का भी आदेश दिया।
हिंदू पक्ष और अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की दलीलें सुनने के बाद जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने कहा कि मेरे विचार में यदि एएसआई को संबंधित संपत्ति पर सर्वेक्षण, वैज्ञानिक जांच करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जाएगा तो इससे मामले के उचित निपटारे में मदद मिलेगी। सच्चे तथ्य इस न्यायालय के सामने आएंगे। मेरा यह भी विचार है कि प्रतिवादी द्वारा दायर आपत्तियां निराधार और तथ्य विहीन हैं।
जिला जज ने कहा कि वादी के आवेदन में मांग की गई है कि वादपत्र में उल्लिखित तथ्यों को न्यायालय के समक्ष वैज्ञानिक तरीकों से साबित किया जाए। ताकि, एकत्रित सामग्री और तथ्यान्वेषी विशेषज्ञ एजेंसी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके। इसमें कोई संदेह नहीं है कि एएसआई देश का एक प्रमुख संस्थान है। यह निर्माण की उम्र और प्रकृति का पता लगाने के लिए जीपीआर सर्वेक्षण और अन्य वैज्ञानिक तरीकों का संचालन करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और उपकरणों से सुसज्जित है।