आधुनिक तकनीक को देश, काल, परंपरा, पर्यावरण और परिवेश के अनुकूल विकसित करने के लिए काशी में अशोक सिंघल विज्ञान और तकनीकी केंद्र बनाया जाएगा। यह घोषणा अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ इलाहाबाद के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने गुरुवार को की।
सुब्रमण्यम स्वामी ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा कि अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ हिंदू पुनर्जागरण के लिए बनारस में इस केंद्र की स्थापना करेगा। स्वामी ने बताया कि केंद्र की रूपरेखा तय करने के लिए आगामी 21 अगस्त को अनुसंधान पीठ की बैठक होगी। इसमें स्थान का भी चयन कर लिया जाएगा।
वहीं पीठ के संयोजक डॉ. चंद्र प्रकाश ने अमर उजाला को बताया कि उनका संस्थान बनारस में यह केंद्र खोलना चाहता है लेकिन अगर जमीन नहीं मिली तो हम मिर्जापुर और सोनभद्र में से किसी एक जिले में यह शोध केंद्र बनाएंगे।
डॉ. प्रकाश ने कहा कि अंग्रेजों के समय से हमने पारंपरिक तकनीक की जगह आयातित चीजों को अपनाया। इसका दुष्प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर अब दिख रहा है। अंग्रेजी दवाएं भी स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही हैं।
अंग्रेजों से आने के पहले हमारे यहां 10 हजार भट्ठियां चलती थीं। इससे बेहतर किस्म का लोहा बनता था। लेकिन आज ये परंपरागत तकनीकें लुप्तप्राय हो गई हैं। हालांकि वर्तमान समय में भी हमारे आदिवासी इलाकों में कई प्राचीन तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
अशोक सिंघल विज्ञान और तकनीकी केंद्र इन आदिवासी इलाकों मेें प्रचलित प्राचीन तकनीकों का अध्ययन कर उन्हें आधुनिक जरूरत के लिहाज से बनाएगा। इससे संबंधित शोध को बढ़ावा देगा। बता दें कि अरुंधती वशिष्ठ अनुसंधान पीठ की स्थापना अशोक सिंघल ने की थी। यह संस्थान विदेशियों के बजाय भारतीयों के शोध और नीतियों को आगे बढ़ाने की दिशा में काम करता है।