पद्मभूषण पार्श्वगायिका सुर गंगा संगीत महोत्सव में शामिल हुईं
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पहली बार काशी आई सुरों की मल्लिका पद्मभूषण आशा भोसले रविवार रात प्रशंसकों के प्यार और हर-हर महादेव के जयघोष पर भावुक हो गईं।
गंगा किनारे सीढ़ियों से लेकर घाटों तक उमड़ी भीड़ का उन्होंने भैंसासुर घाट पर सुर गंगा के मंच से अभिवादन किया। कहा-बनारसी साड़ी की तरह ही यहां के लोग भी बहुत खूबसूरत हैं। अब तक मैं बनारस नहीं आ सकी थी।
इसका मुझे बहुत अफसोस है। भावुक शब्दों में बोलीं कि काशीवासियों के प्यार के आगे कुछ बोल नहीं पा रही हूं।
यूनेस्को के क्रिएटिव सिटी नेटवर्क में बनारस को संगीत का शहर घोषित किए जाने के जश्न में आयोजित संगीत महोत्सव के सम्मान समारोह में आईं पार्श्व गायिका मंच पर पहुंचने के बाद खुद को सुर लगाने से नहीं रोक सकीं।
बताया कि आयोजकों को उन्होंने पहले ही साफ मना कर दिया था कि वह गाएंगी नहीं। हालांकि प्रशंसकों की गुहार पर उन्होंने कहा कि लोग मुझे सुनना चाहते हैं और फिर सुर लगाना शुरू कर दिया। उनके चार चुनिंदा नगमों को भीड़ भी तालियों के साथ दोहराती और झूमती नजर आई।
बताया कि वह भगवान शिव की भक्त हैं। अब तक 10 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर चुकी हैं। आने वाले समय में बद्रीनाथ और अमरनाथ बाबा के भी दर्शन करेंगी ताकि द्वादश ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पूरी हो सके।