फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानिए कौन है पूर्वांचल की खस्ताहाल सड़कों का सबसे बड़ा गुनहगार

Tue, 13 Jun 2017 04:55 PM IST
amarujala.com- Written by: गुंजन श्रीवास्तव
विज्ञापन
10 टन क्षमता वाली सड़कों पर गुजरवाए 35 टन तक के ओवरलोड ट्रक - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
ओवरलोडिंग से खस्ताहाल पूर्वांचल के कई जिलों की सड़कों का सबसे बड़ा गुनहगार भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजा गया एआरटीओ आरएस यादव ही रहा। आठ से दस टन क्षमता वाली सड़कों पर 30 से 35 टन तक के ओवरलोड ट्रक धड़ल्ले से गुजरवाए।
विज्ञापन


स्टेट हाईवे और पीडब्ल्यूडी की जो सड़कें बनने के पांच साल तक चलनी चाहिए थीं, वो कुछ महीनों में टूटकर बदहाल हो गईं। ओवरलोडिंग रोकने के लिए पीडब्ल्यूडी ने शासन को कई बार पत्र भी भेजा लेकिन तत्कालीन सरकार में कोई सुनवाई नहीं हुई। 

पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में स्टेट हाईवे और पीडब्ल्यूडी की 25 हजार किलोमीटर सड़कें हैं। पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं के मुताबिक इन सड़कों के खस्ताहाल होने की बड़ी वजह ओवरलोडिंग रही है।
विज्ञापन


सबसे अधिक ओवरलोड ट्रक चंदौली के नौबतपुर चेकपोस्ट स्थित यूपी-बिहार की सीमा से पूर्वांचल में घुसते थे। ये ओवरलोड ट्रक बनारस, चंदौली, गाजीपुर, सोनभद्र, मीरजापुर, जौनपुर, मऊ, आजमगढ़, इलाहाबाद, कौशांबी आदि जिलों तक जाते थे।

स्टेट हाईवे और पीडब्ल्यूडी के प्रमुख मार्गों की क्षमता आठ से दस टन तक की होती है लेकिन एआरटीओ की वसूली और टोकन के खेल में ओवरलोड वाहन धड़ल्ले से गुजारे जाते रहे। कागज पर 10 टन दिखाया जाता था जबकि हकीकत में 30 से 35 टन माल लदा होता था।

जबकि आम जनता ही नहीं, पूर्वांचल में उद्योग जगत के लिए भी सबसे बड़ी समस्या खराब सड़कें रही हैं। बुनियादी सुविधाएं बेहतर न होने से यहां कोई उद्यमी उद्योग लगाने से कतराता है। बावजूद इसके पूर्ववर्ती सरकार में ओवरलोडिंग पर कोई सख्ती नहीं हुई। 
विज्ञापन

डॉक्टरों ने बताया फिट, बैरक में ही रहना होगा

एआरटीओ आरएस यादव - फोटो : amar ujala
भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल भेजे गए निलंबित एआरटीओ आरएस यादव की पहली रात जिला कारागार में करवट बदलते गुजरी। बैरक नंबर दस में दूसरे बंदियों की तरह जमीन पर कंबल बिछा था। देर रात तक आंखों से नींद गायब रही।

भोर के दौरान ही कुछ घंटे के लिए आरएस को साथी बंदियों ने नींद में देखा। सोमवार को आरएस की इच्छा थी कि बैरक से जेल अस्पताल में शिफ्ट कर दिया जाए लेकिन जेल के डॉक्टरों ने उसे पूरी तरह फिट बताया। कहा कि उम्र के अनुसार जैसा स्वास्थ्य होना चाहिए, वैसा ही है। किसी प्रकार की समस्या नहीं है। इसके बाद आरएस को पुन: बैरक में डाल दिया गया।

जिला जेल की बैरक नंबर दस में निरुद्ध आरएस यादव से सोमवार को मिलने परिवार का एक सदस्य पहुंचा था। जेल सूत्रों ने बताया कि बंदियों के बीच आरएस के चेहरे पर हैरानी और परेशानी के भाव थे। वहीं, कुछेक बंदी आरएस के कारनामों की चर्चाएं उसके सामने ही कर रहे थे।

जेल से मिलने वाले भोजन को आरएस ने बिना किसी ना-नुकुर के खाया और कोई अतिरिक्त मांग नहीं की। उसने बैरक में निरुद्ध अन्य बंदियों से भी कोई खास बातचीत नहीं की। इसके पहले रविवार की रात आरएस कभी करवट बदल रहा था तो कभी अचानक उठकर बैठ जा रहा था।

बता दें कि मकबूल आलम रोड स्थित आरएस के आलीशान मकान से कुछ ही दूरी पर जिला जेल है। जिला जेल के वरिष्ठ अधीक्षक डॉ. बीडी पांडेय ने बताया कि आरएस का स्वास्थ्य ठीक है और उसे कोई अतिरिक्त सुविधा मुहैया कराने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

जो भोजन, पानी, शौचालय और बैरक अन्य बंदियों के लिए है वही आरएस यादव के लिए भी है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें