ओवरलोडिंग से खस्ताहाल पूर्वांचल के कई जिलों की सड़कों का सबसे बड़ा गुनहगार भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भेजा गया एआरटीओ आरएस यादव ही रहा। आठ से दस टन क्षमता वाली सड़कों पर 30 से 35 टन तक के ओवरलोड ट्रक धड़ल्ले से गुजरवाए।
स्टेट हाईवे और पीडब्ल्यूडी की जो सड़कें बनने के पांच साल तक चलनी चाहिए थीं, वो कुछ महीनों में टूटकर बदहाल हो गईं। ओवरलोडिंग रोकने के लिए पीडब्ल्यूडी ने शासन को कई बार पत्र भी भेजा लेकिन तत्कालीन सरकार में कोई सुनवाई नहीं हुई।
पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में स्टेट हाईवे और पीडब्ल्यूडी की 25 हजार किलोमीटर सड़कें हैं। पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं के मुताबिक इन सड़कों के खस्ताहाल होने की बड़ी वजह ओवरलोडिंग रही है।
सबसे अधिक ओवरलोड ट्रक चंदौली के नौबतपुर चेकपोस्ट स्थित यूपी-बिहार की सीमा से पूर्वांचल में घुसते थे। ये ओवरलोड ट्रक बनारस, चंदौली, गाजीपुर, सोनभद्र, मीरजापुर, जौनपुर, मऊ, आजमगढ़, इलाहाबाद, कौशांबी आदि जिलों तक जाते थे।
स्टेट हाईवे और पीडब्ल्यूडी के प्रमुख मार्गों की क्षमता आठ से दस टन तक की होती है लेकिन एआरटीओ की वसूली और टोकन के खेल में ओवरलोड वाहन धड़ल्ले से गुजारे जाते रहे। कागज पर 10 टन दिखाया जाता था जबकि हकीकत में 30 से 35 टन माल लदा होता था।
जबकि आम जनता ही नहीं, पूर्वांचल में उद्योग जगत के लिए भी सबसे बड़ी समस्या खराब सड़कें रही हैं। बुनियादी सुविधाएं बेहतर न होने से यहां कोई उद्यमी उद्योग लगाने से कतराता है। बावजूद इसके पूर्ववर्ती सरकार में ओवरलोडिंग पर कोई सख्ती नहीं हुई।