राम की नगरी में उत्सव, उल्लास और उजास का संगम शनिवार की सुबह लोगों की आंखों में रच-बस गया। मौका था अयोध्या में भगवान राम के राजगद्दी पर विराजमान होने के बाद भोर की आरती का। महीने भर से जिनकी शान में घोड़ों पर डंका बजता था और वह शाही बग्घी या हाथी पर सवार होकर निकलते थे, वो काशिराज डॉ. अनंत नारायण सिंह राम की आरती देखने के लिए नंगे पांव पहुंचे। आरती में सैलाब उमड़ने से रामनगर चौक से किला रोड तक कहीं तिल रखने तक की जगह न थी। उधर, अंतिम दिन शनिवार को रामबाग में श्रीराम उपवन विहार, सनकादिक मिलन, पुरजनोपदेश आदि की लीला हुई।
रंग-बिरंगी लतरों से किले को दुल्हन की तरह सजाया गया था। अयोध्या के मैदान में शुक्रवार की रात राम राज्याभिषेक की लीला के बाद रात 12 बजे तक तो झांकी दर्शन चला। इसके बाद राम विश्राम के लिए चले गए लेकिन भोर की आरती के लिए भक्त रतजगा करने लगे। नावों, बजरों से भोर में भक्तों की भीड़ गंगा पार हुई तो वाहनों के अलावा बाइक की सवारी और पैदल यात्रा करते हुए बड़ी तादाद में लीला प्रेमी पहुंचे। भोर में चार बजे तक किला रोड से लेकर अयोध्या के मैदान तक सिर्फ लीला प्रेमियों के सिर ही नजर आने लगे। जगह -जगह संत और भक्तों की टोलियां भजनों के भाव में लीन होकर आनंद ले रही थीं। सूर्य की लाली निकलने से पहले 5:35 बजे किले से काशिराज नंगे पांव निकले। आगे-आगे मशालची और तलवार लिए संतरी और सिपहसालार चल रहे थे। काशिराज के अयोध्या पहुंचने के साथ ही मेहताबी रोशनी में भगवान राम की कौशिल्या ने आरती उतारी। आरती के बाद श्रीराम ने गंगा दर्शन किया।
रामनगर किले में शनिवार को दक्षिणमुखी काले हनुमान के दर्शन के लिए पट खोले जाने के बाद दर्शन के लिए लंबी कतार लग गई। यह मंदिर भोर की आरती के बाद वर्ष में एक बार इस मंदिर को आम भक्तों के लिए खोला जाता है। सांवरे हनुमान के दर्शन के लिए दोपहर बाद तीन बजे तक भक्तों की भीड़ किले में लगी रही। इस दौरान हर हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे। भोर की आरती के बाद जन सैलाब के बीच से निकलकर काशिराज अनंत नारायण सिंह हवाखोरी के लिए निकल गए। पंरपरा के अनुसार राजा आरती के बाद हवाखोरी के लिए निकलते हैं। पंचवटी, लंका समेत अन्य लीला स्थलों से होकर काशिराज कार से किले में वापस आए।