अस्पताल में 390 दवाओं की सूची उपलब्ध होने के बाद भी मरीजों को केवल 80 प्रकार की दवाइयां ही दी जा रही हैं इसको लेकर रितु माहेश्वरी ने सभी चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ को दवाओं की उपलब्धता के बारे में जानकारी देने की बात कही। निरीक्षण में दवाइयों का रख-रखाव भी मानक के विपरीत मिलने पर भी सचिव ने नाराजगी जताई। एक्सरे विभाग में पहुंची तो यहां पांच एक्सरे मशीनें होने के बावजूद केवल एक डिजिटल मशीन ही काम कर रही थी।
इस पर डिजिटल मशीन को छोड़कर बाकी सभी मशीनों को दूसरी स्वास्थ्य इकाइयों पर भेजे जाने को कहा। सचिव स्वास्थ्य ने बताया कि केवल दवा वितरण, एक्सरे ही नहीं मंडलीय अस्पताल की पैथालॉजी में जांच की व्यवस्था में भी बड़ी खामियां मिली हैं। इस वजह से मरीजों को समय पर और उचित उपचार मिलने में बाधा आ रही है। अस्पताल प्रशासन को इन कमियों को तुरंत दूर करवाने को कहा।
15 दिन में एमसीएच विंग में शिफ्ट करनी होगी सेवाएं, कमियां भी दूर करनी होगी
मंडलीय अस्पताल के निरीक्षण के दौरान सचिव स्वास्थ्य ने यहां बनने वाले 500 बेड वाले सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के जगह को भी देखा। इस हॉस्पिटल के बनने की वजह से यहां के कई भवन को गिराया जाना है। ऐसे में गिराए जाने वाले वार्डों को महिला अस्पताल परिसर स्थित एमसीएच विंग में शिफ्ट किया जाना है।
शिफ्टिंग की कार्रवाई धीमी होने पर नाराज सचिव ने इसके लिए कार्यदायी संस्था से जुड़े लोगों को 15 दिन का समय दिया। सचिव ने चेतावनी दी कि 15 दिन के अंदर शिफ्टिंग संबंधी काम न पूरा करने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कहा कि समय से वार्ड की शिफ्टिंग होने के बाद निर्माण का काम तेज होगा।
सचिव ने अस्पताल के एसआईसी डॉ. बृजेश कुमार से ऑनलाइन पंजीकरण और स्कैन की व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने को भी कहा, जिससे कि मरीज घर से ही पंजीकरण एवं भुगतान कर सकें। इसके अलावा ऑनलाइन व्यवस्था के लागू होने से मरीजों को अस्पताल पहुंचकर क्यूआर कोड स्कैन कर टोकन प्राप्त करना होगा। इस दौरान सीएमओ डॉ.एनपी सिंह, मंडलीय अस्पताल के एसआईसी डॉ.बृजेश कुमार, डॉ. अभिषेक राय आदि लोग मौजूद रहे।
क्या-क्या मिली गड़बड़ियां
- अस्पताल में आवश्यक औषधि सूची में उपलब्ध 390से अधिक दवाओं के सापेक्ष ओपीडी में मात्र लगभग 80-85 दवाओं का वितरण होता मिला।
- अस्पताल द्वारा औषधियों की मांग को संबंधित पोर्टल पर अपलोड नहीं किया जा रहा है। इसको तत्काल सही करना होगा।
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और आभा आधारित सेवाएं भी सही नहीं मिली। इसको जल्द से जल्द सुधार करने की जरूरत है।
- मरीजों की जांच रिपोर्ट को उनके मोबाइल पर नहीं भेजने से मरीजों को रिपोर्ट के लिए चक्कर लगाना पड़ रहा है। एक सपताह में व्हाटसए पर भेजने का समय दिया गया।