16 मई को सर्वे के दौरान वजूखाने के पास मिले कथित शिवलिंग के श्रृंगार राग भोग आरती दर्शन पूजन के साथ सम्पूर्ण ज्ञानवापी को आदि विश्वेश्वर श्री काशी विश्वनाथ की संपदा बताते हुए मंदिर घोषित करने की मांग की गई है।
ज्ञानवापी को लेकर मुकदमों को दाखिल होने का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। अब एक और वाद वाराणसी निवासी विवेक सोनी व जयध्वज श्रीवास्तव की तरफ से अधिवक्ता मदन मोहन यादव ने दाखिल किया है।
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यह वाद सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में दाखिल हुआ था, जहां से जिला जज के आदेश पर स्थानांतरित होकर सिविल जज सीनियर डिवीजन फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट महेंद्र प्रसाद पांडेय की कोर्ट में गया। इस वाद में बीते 16 मई को सर्वे के दौरान वजूखाने के पास मिले कथित शिवलिंग के श्रृंगार, राग भोग, आरती, दर्शन पूजन के साथ संपूर्ण ज्ञानवापी को आदि विश्वेश्वर श्री काशी विश्वनाथ की संपदा बताते हुए मंदिर घोषित करने का अनुतोष मांगा गया है।
इस मामले में यूपी सरकार, डीएम, पुलिस कमिश्नर और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद को पक्षकार बनाया गया है। अदालत ने वाद पर सुनवाई के बाद पक्षकारो को नोटिस जारी करते हुए जबाबदेही दाखिल करने के लिए 30 नवम्बर की तिथि नियत कर दी।