कोर्ट परिसर के बाहर वादी पक्ष की महिलाएं और अधिवक्ता
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अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से कहा गया कि हाईकोर्ट के 12 मई के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट का 19 मई से रोक है। इसी आदेश के क्रम में एएसआई सर्वे का आवेदन दिया गया है, जिसे सुनने का अधिकार जिला जज को नहीं है। मामले में एक बार सर्वे हो चुका है, उस पर आपत्ति की गई है। बिना उसके निस्तारण के सर्वे का दूसरा आदेश नहीं दिया जा सकता है। हिंदू पक्ष ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की बात कही है, लेकिन उसका कोई साक्ष्य नहीं दिया।
अदालत में हिंदू पक्ष की चार वादिनी रेखा पाठक, मंजू व्यास, लक्ष्मी देवी और सीता साहू की तरफ से बीते 16 मई को प्रार्थना पत्र दिया गया था। कहा गया था कि ज्ञानवापी में सील किए गए वजूखाना को छोड़कर बाकी क्षेत्र का एएसआई से रडार तकनीक से सर्वे कराया जाए। इस पर बीते 19 मई को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने आपत्ति की थी। हिंदू पक्ष ने 22 मई को अपनी दलील रखी थी। सात जुलाई को जिला जज के अवकाश पर रहने के कारण 12 जुलाई की तारीख पड़ी और हिंदू पक्ष ने प्रार्थना पत्र के निस्तारण पर बल दिया। तब मसाजिद कमेटी ने आपत्ति के लिए समय मांगा और 14 जुलाई की तिथि सुनवाई के लिए नियत की गई। 14 जुलाई को कोर्ट आदेश के लिए पत्रावली सुरक्षित कर ली और सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तारीख तय की।