मानसून में देरी के चलते पहले से ही सूखे की आशंका से परेशान प्रदेश के किसानों की जेब पर धान के नकली बीज के जरिये भी डाका डाला जा रहा है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सामान्य धान प्रजाति वारंगल को हाइब्रिड बताकर बाजार में उतार दिया गया है। दामिनी प्रजाति के नाम से नकली बीज की अलग-अलग 10 कंपनियों के नाम से पैकिंग बाजार में धड़ल्ले से बेची जा रही है। शिकायत मिलने पर अपर कृषि निदेशक संतोष कुमार खरे ने वाराणसी के अलावा सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, इलाहाबाद, रायबरेली, मऊ, बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़, भदोही (ज्ञानपुर), मिर्जापुर और अमेठी के जिला कृषि अधिकारियों को पत्र भेजकर दामिनी रिसर्च सीड्स की बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाने का निर्देश नवंबर, 2015 में दिया था लेकिन इस मामले में कार्रवाई करने के बजाय निर्देश ही दबा दिए गए। उप कृषि निदेशक एके सिंह ने गुरुवार को धान के नकली बीजों को छापा मारकर जब्त करने का निर्देश दिया है।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से उठाई गई महज 15 रुपये प्रति किलो की सामान्य दर्जे की वारंगल प्रजाति यूपी में किसानों को उन्नत किस्म की बताकर 100 रुपये किलो की दर से बेची जा रही है। पता चला है कि वाराणसी की ही एक बीज कंपनी कृषि महकमे के अधिकारियों की मिलीभगत से लंबे समय से यह गोरखधंधा चलाकर किसानों की गाढ़ी कमाई हजम कर रही है। करीब 30 हजार क्विंटल धान बिना प्रमाणित किए ही हाइब्रिड के नाम पर अलग-अलग कंपनियों के नाम से पैकिंग कराकर बाजार में उतार दिए गए हैं। दामिनी केकेएस सुधारित धान के अलावा दामिनी वसुंधरा के नाम से बीज भंडारों पर पैकिंग देखी जा सकती है। ठगी का आलम यह है कि देहरादूनी बासमती के बीज 80 रुपये किलो बिक रहे हैं लेकिन नकली दामिनी ब्रांड बीज की कीमत इससे भी अधिक यह बताकर वसूली जा रही है कि इसकी एक बीघा (20 बिस्वा) में 18 से19 क्विंटल पैदावार होगी।
अब खरीफ का सीजन आते ही दामिनी धान के नकली बीज बाजार में धड़ल्ले से ऊंची दरों पर बेचे जा रहे हैं। किसान अधिक पैदावार की लालच में नकली बीज बेचने वालों के जाल में फंस रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी संजय सिंह को इस गोरखधंधे के बारे में कुछ भी पता नहीं है। पूछने पर उनका कहना था कि रुटीन में दो नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट गड़बड़ पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं इलाहाबाद के जिला कृषि अधिकारी गणेश प्रसाद दुबे ने दामिनी धान बीज को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है।