कचहरी स्थित गोलघर के पास नारी के सम्मान नाटक का मंचन करते कलाकार।
नारी की जिजीविषा और जीवटता को जीवंत करने वाली लक्ष्मी आखिरकार आईएएस बन गई...। यह कहानी है निमभन आय वर्ग के एक परिवार की जिसमें गरीबी, बीमारी और अभाव का बसेरा है। जहां परिवार का मुखिया बाबा बेटी-बेटा में फर्क करता है। बावजूद इसके लक्ष्मी ने विषम परिस्थितियों में न केवल परिवार की जिम्मेदारियों को संभाला बल्कि आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया। इन सबके बीच देश की सबसे उच्च सेवा आईएएस की परीक्षा पास कर लक्ष्मी बड़ी अधिकारी बनी। उसने समाज को आईना दिखाते हुए नारी के सम्मान का संदेश दिया।
अमर उजाला और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को शहर में चार स्थानों पर ‘नारी का सम्मान’ नुक्कड़ नाटक का मंचन हुआ। गोलघर कचहरी, लहुराबीर, आईपी मॉल सिगरा और कबीर नगर कॉलोनी (दुर्गाकुंड) के समीप नाटक से आम जनमानस को नारी सशक्तिकरण का संदेश दिया गया। साफ्ट पावर आर्ट एंड कल्चर संस्था के कलाकारों ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
नुक्कड़ नाटक के जरिए बेटी-बेटे का फर्क मिटाने के लिए लोगों को जागरूक किया गया। लक्ष्मी ने बीमार पिता की सेवा के साथ खिलौने बनाकर परिवार का जीविकोपार्जन किया। इस दौरान उसने पढ़ाई नहीं छोड़ी। उसकी लगन और मेहनत का परिणाम रहा कि जिस बेटे को पढ़ाने के लिए पिता लक्ष्मी को नहीं पढ़ाना चाहते थे, उसी बेटी लक्ष्मी ने अपने भाई को चपरासी की नौकरी दिलाकर समाज को आईना दिखाया।
दोपहर 1:30 से 1:50 बजे तक गोलघर कचहरी, 2:40 से तीन बजे तक लहुराबीर, 3:20 से 3:40 बजे तक आईपी मॉल सिगरा और शाम 4:20 से 4:40 बजे तक कबीर नगर कॉलोनी के पास नुक्कड़ नाटक देखने के लिए राहगीरों के पांव ठिठक गए। वाहन चालक भी रुके और कलाकारों के बेजोड़ अभिनय की सराहना की। ‘नारी का सम्मान’ प्रेरणा के मकसद से मंचित नाटक कामयाब रहा। संस्था के सचिव ज्ञानचंद्र यादव के नेतृत्व में कलाकारों ने अपनी भूमिका बखूबी अदा की। सीमा रंजन ने लक्ष्मी, रोहित पाल ने लक्ष्मी के पिता, रुद्रदेव विश्वकर्मा ने डॉक्टर, अरविंद यादव ने रामू नौकर, अर्श शर्मा ने लक्ष्मी के छोटे भाई बबुआ, भूपेंद्र सिंह ने लक्ष्मी की मां का किरदार निभाया।