डीएवी पीजी कॉलेज के इतिहास विभाग के छात्र फोरम विरासत की ओर से बृहस्पतिवार को परिचर्चा हुई। भारतीय ज्ञान परंपरा के अलग अलग मुद्दों पर वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर के रूप में प्राचीन विज्ञान, दर्शन, गणित, खगोल, चिकित्सा विज्ञान, आयुर्वेद को गिनाया। डॉ. प्रतिभा मिश्रा ने कहा कि प्राचीन वेद भारतीय ज्ञान परंपरा का स्रोत रहे हैं। उसी आधार पर भारतीय ज्ञान परंपरा सदियों से मानव सभ्यता को आकार देती आई है। विरासत फोरम के संयोजक डॉ. शोभनाथ पाठक ने कहा कि भारत का पारंपरिक ज्ञान, स्वदेशी या स्थानीय समुदायों की सांस्कृतिक परंपराओं में निहित ज्ञान प्रणालियों को बताता है। कार्यक्रम में डॉ. शिवनारायण और डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह ने अपनी-अपनी बातें रखीं। छात्रों में स्नातकोत्तर से प्रिंस पांडेय, सोनू निषाद, आशुतोष मिश्र, रिया गंगवार, मोनिका राय ने विचार रखें।