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Varanasi News : गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल दिखी, पहले खेली अबीर से होली, फिर साथ बैठकर किया इफ्तार

Sun, 16 Mar 2025 09:58 PM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

होली मिलन समाराेह में गूंजा-सबके पंथ अलग हों लेकिन खून और खानदान एक है। काशी से सौहार्द की ये तस्वीर सुभाष भवन में देखने को मिली। पहले यहां अबीर खेलकर होली का पर्व मनाया गया फिर एक साथ बैठकर सभी ने रोजा इफ्तार किया।
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सौहार्द की मिसाल - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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 खूबसूरत भारत का नजारा रविवार को लमही स्थित सुभाष भवन में देखने को मिला। यहां हिंदू और मुसलमानों ने एक साथ होली मनाई। एक दूसरे को गुलाल और अबीर लगाकर होली की मुबारकबाद दी और जैसे ही मगरिब की अजान हुई, सभी ने एक साथ दस्तरख्वान पर बैठकर इफ्तार किया।

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रविवार को विशाल भारत संस्थान की ओर से खानदान मिलन, रोजा के बाद इफ्तार भी, होली का अबीर उत्सव भी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। होली मिलन और रोजा इफतार के दौरान सभी ने एक स्वर से सबके पंथ अलग हों, लेकिन खून और खानदान एक का संकल्प दोहराया।

कार्यक्रम के आयोजक विशाल भारत संस्थान के जिला चेयरमैन नौशाद अहमद दूबे ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अबीर लगाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विशाल भारत संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीगुरु ने सबको अबीर लगाकर बधाई दी।
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नाजनीन अंसारी ने कहा कि जब पूर्वजों, परंपराओं, खून और खानदान से एक हैं तो होली के रंगों और दीपावली की रोशनी से नफरत क्यों है? अफसर बाबा ने कहा कि अगर रंग लगवाने से एकता आएगी, तो मैं सौ बार रंग लगवाऊंगा। रंग लगवाना हराम नहीं है।

बहादुर शहीद के सज्जादानशीं बाबू खान ने सबको अबीर लगाया और कहा कि अल्लाह ने दुनिया रंग बिरंगी बनाई है। अफवाहों में न पड़ें, एक रहें। अध्यक्षता डॉ. कवींद्र नारायण श्रीवास्तव ने की। इस दौरान डॉ. अर्चना भारतवंशी, डॉ. नजमा परवीन, डॉ. मृदुला जायसवाल, आभा भारतवंशी, डॉ. गुफरान जावेद, अब्दुर्रहमान दूबे, मु. शहाबुद्दीन जोसेफ तिवारी, खुर्शीदा बानो आदि शामिल हुए।

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