दादा बीएचयू में ही थे प्रोफेसर
अमीश त्रिपाठी ने कहा कि उनकी पढ़ाई तमिलनाडु में हुई लेकिन उनके दादा पं.बाबूलाल त्रिपाठी बीएचयू में ही प्रोफेसर थे। इसलिए मूल तौर पर वह काशी के ही हुए। प्रो. चंद्रमौलि उपाध्याय को भी वह बाबा मानते हैं।
संगमम कार्यक्रम में अमीश त्रिपाठी ने छात्रों के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि जब हम एक विश्व शक्ति बनने की राह पर आगे बढ़ रहे हैं, तो हमें अपने पूर्वजों की तीन प्रमुख सीख का पालन करना होगा। हम उस परंपरा से आते हैं जहां हम दूसरों पर हमला नहीं करते। इसलिए हम एक महाशक्ति नहीं बल्कि विश्व गुरु की तरह बर्ताव करेंगे। हमें भारत की जड़ों और प्राचीन विरासत को समझने की जरूरत है। ये संगमम इसी का उत्सव है।