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काशी में गूंजेगी शक्ति साधना: 22 जून से शुरू होगा अंबुवाची पर्व, महामुद्रा यंत्र के होंगे दुर्लभ दर्शन

Tue, 09 Jun 2026 07:31 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: 22 जून से अंबुवाची पर्व शुरू होगा। इस दौरान महामुद्रा यंत्र के दुर्लभ दर्शन होंगे। 30 जून को पूजित लाल वस्त्र, अभिषेक जल और चुनरी भक्तों में प्रसाद स्वरूप वितरित होंगे। 
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मां कामाख्या मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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काशी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं में शामिल अंबुवाची पर्व इस वर्ष 22 जून से शुरू होगा। कमच्छा स्थित मां कामाख्या मंदिर में पांच दिनों तक चलने वाले इस विशेष पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। तांत्रिक साधना, शक्ति उपासना और मां के रजस्वला स्वरूप से जुड़ा यह पर्व काशी की विशिष्ट धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

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अंबुवाची पर्व 22 से 26 जून तक मनाया जाएगा। कामाख्या मंदिर में पांच दिवसीय पर्व के दौरान तीन दिनों तक मंदिर का कपाट बंद रहेगा। 22 को दिन में मां के श्रृंगार और पूजन होगा। रात में महाआरती और पूजन के साथ अंबुवाची पर्व शुरू हो जाएगा। इसके बाद 25 जून तक मंदिर का कपाट बंद हो जाएगा। इस दौरान मां रजस्वला हो जाती हैं। पांच दिनों तक भक्त मंदिर में पूजन अर्चन करेंगे। 

26 को सिंगार पूजन के साथ आम भक्तों के लिए दर्शन के लिए मंदिर का पट खोल दिया जाएगा। कपाट बंद होने से पूर्व श्री महामुद्रा यंत्र पर विशेष वस्त्र चढ़ाए जाएंगे। इस अवधि में नियमित पूजा-अर्चना स्थगित रहेगी, जबकि श्रद्धालु मंदिर परिसर में रहकर मां की आराधना और परिक्रमा कर सकेंगे। मां को चढ़ाई गई चुनरी भक्तों में वितरण की जाएगी।
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मंदिर के प्रधान पुजारी देवेंद्र पुरी के अनुसार, 26 जून को मां का गंगाजल, गुलाबजल और औषधियों से महाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद गर्भगृह के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इसी दिन श्री महामुद्रा यंत्र का वार्षिक महाभिषेक और दुर्लभ दर्शन भी कराए जाएंगे। मंदिर प्रशासन के अनुसार 30 जून को विशेष रूप से वत्र (पूजित वस्त्र) का वितरण किया जाएगा। पर्व के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

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108 परिक्रमा का विशेष महत्व

अंबुवाची पर्व में 108 परिक्रमा का विशेष महत्व माना जाता है। देवेंद्र पुरी ने बताया कि श्रीकामाख्या मंदिर स्थापित होने का उद्धरण भविष्य पुराण में भी मिलता है। यह 52 शक्तिपीठ में असम में विराजमान मां कामाख्या देवी का प्रतिरूप है। मंदिर में माता का विग्रह श्रीमहामुद्रा यंत्र के रूप में स्थापित है, इसलिए यह सिद्ध यंत्र पीठ है। मां कामाख्या के गर्भगृह के अंदर काशी के अष्टभैरव में से एक श्रीक्रोधन भैरव, श्रीभद्रकाली, श्रीहनुमान जी, श्रीचौसठ योगिनीजी का विग्रह स्थापित है। मान्यता है कि इस दौरान पूजित लाल वस्त्र, अभिषेक का पवित्र जल और मां की चुनरी धार्मिक अनुष्ठानों, तांत्रिक साधना तथा कष्ट निवारण के लिए अत्यंत फलदायी होते हैं।
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