इनकी भी सुनें
पूर्व कुलपति ने बिना ईसी के 20 से ज्यादा सलाहकार नियुक्त कर दिए। तीन साल में चंदन के पेड़, एल्युमिनियम के रॉड, एसी केबल और बैटरियां भी चोरी हुईं। 2-3 महीने के अंतराल में दो-दो एग्जाम हो जा रहे हैं। कब सेशनल और कब प्रैक्टिकल हो रहा, पता नहीं। - राजीव नयन, एमए अर्थशास्त्र विभाग।
छात्र स्वास्थ्य केंद्र में पैरासिटामॉल समेत 2-4 दवाओं को छोड़ दें तो बाकी कोई भी दवा उपलब्ध नहीं है। जबकि प्रोफेसरों और कर्मचारियों को कर्मचारी स्वास्थ्य केंद्र में ज्यादातर दवाएं मिल जाएंगी। कोई भी बीमारी हो छात्र-छात्राओं को वही पांच दवाइयां ही मिलेंगी। बिड़ला हॉस्टल में डेढ़ साल से मेस नहीं चला है। - नील दुबे, शोध छात्र, हिंदी विभाग।
बाहरियों के लिए पर्यटन केंद्र बन गया है। यहां से पीएचडी कर रहा छात्र पूरे समय प्रोफेसर और उनके घर वालों की चाकरी करता है। हम अपना दर्द किसको सुनाएं कैंपस में कोई आगे नहीं आता। - डॉ. शुभम तिवारी, बीएचयू।
इमरजेंसी पॉवर को कॉमन बना दिया गया। शैक्षणिक संस्थानों का सलाहकार मिलिट्री के लोगों को बनाया गया। जबकि इनकी शैक्षणिक योग्यता स्नातक होती है। छात्रसंघ न होने से विद्यार्थियों का प्रशासनिक और एकेडमिक शोषण बढ़ जाता है। - डॉ. मृत्युंजय तिवारी, बीएचयू।
विश्वविद्यालय एक बाजार हो गया है। बाजार में गुणवत्ता का ध्यान दिया जाता है, लेकिन यहां पर उसका भी इल्म नहीं है। सीयूईटी के बजाय बीएचयू खुद के सिस्टम से प्रवेश परीक्षाएं कराए। जिन कोर्सों की 50 फीसदी सीटों पर भी प्रवेश नहीं हो रहे, उन्हें बंद कर दिया जा रहा है। ये कोई समाधान नहीं है। - अभिषेक सिंह, शोध छात्र।
बीएचयू की बस में अक्सर छेड़खानी होती है। आंदोलन के दौरान प्रॉक्टोरियल बोर्ड के लोग छात्रों को भड़काते हैं, जिससे छात्र उग्र प्रदर्शन करते हैं और उन लोगों को मुकदमा चलाने और जबरन आंदोलन खत्म कराने का अवसर मिल जाता है। - वंदना उपाध्याय, एमए।
प्रवेश के बाद कुछ ही दिनों में मिड टर्म और फिर सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू हो जाती हैं। सालाना परीक्षा के पुराने पैटर्न को लागू करना चाहिए। सेमेस्टर पैटर्न यूरोपीय देशों से आया है। इसे बंद कर देना चाहिए। - अभय सिंह, शोध छात्र।
कैंपस में हर नेत्रहीन छात्र अपनी जान को हथेली पर लेकर सड़क पर चलता है। कब कार टक्कर मारकर चली जाए पता नहीं। कहीं भी ब्रेल साइनेज नहीं है। जबकि हजारों की संख्या में छात्र होंगे। - राहुल, दृष्टिबाधित शोध छात्र।
बीएचयू में ढेरों स्कीम और स्कॉलरशिप बनाई गई है। लेकिन जानकारी न होने के चलते जरूरतमंद छात्रों को इनका फायदा नहीं मिलता। विदेशों में रिसर्च पेपर प्रस्तुत करने के लिए प्रोफेसर को डेढ़ लाख और छात्र को सिर्फ 50 हजार दिया जाता है। - सत्यवीर सिंह, शोध छात्र।
बीएचयू की सुरक्षा सिर्फ चार अधिकारियों तक ही केंद्रित हो गईं हैं। कुलपति, रेक्टर, रजिस्ट्रार और चीफ प्रॉक्टर। पीएचडी आवेदन में कृषि, कला और विज्ञान संकाय के छात्रों को अलग-अलग श्रेणी में रखा गया है। इससे छात्रों की एकता प्रभावित हो जाएगी। - अधोक्षज पांडेय, शोध छात्र, एसवीडीवी।
अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में माैजूद छात्र-छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला
नहीं शामिल हुआ विवि प्रशासन
अमर उजाला के इस संवाद में बीएचयू का अधिकारिक पक्ष रखने के लिए बीएचयू के अधिकारियों को भी मेल से आमंत्रण दिया गया था लेकिन कोई भी इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचा।