मिट्टी से पाटा गया वरुणा नदी का जलभराव क्षेत्र
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देर्शों के बाद भूमि व वनमफियाओं और अफसरों के गठजोड़ पर प्रशासन ने गाज गिरानी शुरू कर दी है। वरुणा नदी का गला घोंटकर उसके किनारे की 25 करोड़ से अधिक की कीमत वाली डेढ़ बीघे जमीन को फर्जी तरीके से सपा के पूर्व सांसद जवाहर जायसवाल के भाई होटल कारोबारी हीरालाल जायसवाल के पक्ष में विनिमय करने के मामले में प्रशासन ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई की है।
अमर उजाला में तीन दिन तक खबर छपने के बाद डीएम योगेश्वर राम मिश्रा के निर्देश पर जमीन से हीरालाल का नाम काटकर उसे बंजर भूमि में दर्ज कर दिया गया। इस जमीन पर अब नगर निगम का कब्जा हो गया है, नई खतौनी भी जारी कर दी गई।
वहीं, नियमों को ताक पर फर्जी तरीके आदेश करने वाले अपर उप जिलाधिकारी बसंत कुमार गुप्ता के न्यायिक कार्य पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। भीमनगर में वरुणा किनारे स्थित करीब डेढ़ बीघे जमीन पर शेल्टर होम का निर्माण चल रहा है।
पास में ही आठ बिस्वा जमीन पर होमगार्ड कमांडेंट कार्यालय का निर्माण प्रस्तावित है। इसी बीच चंदौली के पूर्व सांसद जवाहर लाल जायसवाल के भाई होटल कारोबारी हीरालाल जायसवाल के आवेदन पर अपर उप जिलाधिकारी सदर बसंत कुमार गुप्ता ने हीरालाल के पक्ष में जमीन के विनिमय का आदेश कर दिया।
ये पूरा खेल होता रहा लेकिन नगर निगम और होमगार्ड कमांडेंट कार्यालय के लोग बेखबर रहे। भीमनगर के लोगों की शिकायत पर कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने एसीएम चतुर्थ ेसे जांच कराई तो मामले ने तूल पकड़ लिया। सरकार बदलने के बाद स्थितियां भी बदल गई थीं।
अमर उजाला ने एक साल पहले शुरू की थी मुहिम
मिट्टी से पाटा गया वरुणा नदी का जलभराव क्षेत्र
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, अमर उजाला में खबर छपने के बाद शासन ने भी इसका संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी थी। दबाव के बीच बुधवार को डीएम के निर्देश पर नगर निगम कीर जमीन से हीरालाल का नाम काटकर उसे बंजर भूमि में दर्ज कर लिया गया।
डीएम योगेश्वर राम मिश्रा ने कहा कि अपर उप जिलाधिकारी सदर बसंत कुमार गुप्ता के न्यायिक कार्यों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। अपर उप जिलाधिकारी सदर न्यायालय का काम एसीएम प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ के न्यायालय में स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया है।
अमर उजाला ने एक साल पहले शुरू की थी मुहिम
असि नदी की ‘हत्या’ करने वाले भूमाफियाओं और अफसरों के गठजोड़ की गिद्ध दृष्टि ने वरुणा नदी को भी उस ओर धकेलना शुरू कर दिया। डूब क्षेत्र और तटों पर कब्जे से और उस पर खड़ी हो गई भ्रष्टाचार की अट्टालिकाओं से वाराणसी की पहचान यह नदी भी आर्तनाद कर उठी।
मगर किसी ने उसकी पुकार नहीं सुनी। स्थानीय लोगों ने बात उठाई भी तो अफसरों और भूमाफियाओं ने उनकी आवाज दबा दी। पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान अमर उजाला ने एक साल पहले जब वरुणा की मुक्ति की मुहिम ‘मुद्दा वाराणसी की विरासत का’ शुरू की तो बड़े अभियान के बाद भी 893 लोगों को नोटिस भर जारी करके इतिश्री कर ली गई। खैर देर से ही सही कार्रवाई शुरू हुई तो लोगोें को उम्मीद भी जगी है कि अब वरुणा पूरी तरह से कब्जा मुक्त हो जाएगी।
विनिमय के नियम से कुछ ऐसे हुआ खेल
विनिमय की आड़ में जमीन के हस्तांतरण का खेल हुआ है। हीरालाल जायसवाल ने नगर निगम की करीब डेढ़ बीघे जमीन लेकर उसे पास में ही उतनी ही जमीन हस्तांतरित कर दी। जमीन के इसी हस्तांतरण को ही विनिमय कहते हैं।
हीरालाल ने नगर निगम की खाली जमीन तो ले ली लेकिन बदले में निगम को जो जमीन दी उस पर पहले से ही लोगों के आवास बने हुए हैं। इसे खाली कराना प्रशासन के लिए मुश्किल था। अपर उप जिलाधिकारी सदर ने नियमों के विरुद्ध जमीन का हस्तांतरण किया।