फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एन राजम ने वायलिन पर ठुमरी होरी की धुन से जीता दिल

Thu, 19 Feb 2015 02:10 AM IST
वाराण्ासी, ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। शिवपरात्रि संगीत समारोह की आखिरी निशा को डा. एन राजम ने वायलिन पर बनारसी ठुमरी और होरी के धुनें बजाकर यादगार बना दिया। हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय में बुधवार की शाम विशाल कृष्ण ने कथक की शानदार प्रस्तुति की।  
विज्ञापन

शुरूआत में उभरती नृत्यांगना अमानत बंसल ने भरतनाट्यम में नटराज और वर्णनम की प्रस्तुति से की। इसके बाद भागीरथ जालान ने राग मारु बिहाग की बंदिश ‘मोरे बलमा अजहू न आए’ सुनाई।
तबले पर उनका साथ ललित कुमार ने दिया। विशाल कृष्ण ने मयूर नृत्य और थाली नृत्य के बाद तुलसी दास की रचना ‘ठुमक चलत रामचंद्र बाजे पैजनिया’ और होरी पर भाव नृत्य किया। तबले पर कुशाल कृष्ण, सरोद पर अंशुमान महराज और बासुरी पर सनीश ज्ञावली ने संगत की। बोल पढंत संतोष ने किया।
विज्ञापन

निशा की अंतिम कलाकार डा. एन राजम ने राग बागेश्वरी कान्हड़ा में अलाप, जोड़ के बाद द्रुत लय में गतकारी की। उसके बाद ठुमरी और होरी की धुनें सुनाईं। तबले पर कुबेर नाथ मिश्र और वायलिन पर उनकी नतिनी रागिनी शंकर ने साथ किया। कलाकारों का स्वागत किशन जालान और संचालन हरि राम द्विवेदी ने किया। यह कार्यक्रम सेठ किशोरी लाल जालान सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित था।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें