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नीलगिरी के साथ शाइन सिटी का भी रिकार्ड खंगालने लगी पुलिस

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नीलगिरी इंफ्रासिटी मामले में एसआईटी गठित होने के बाद अब मालिकों और सहयोगियों के संपत्तियों के बारे में कमिश्नरेट पुलिस ने ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही जिले के सैकड़ों लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने वाली रियल इस्टेट की शाइन सिटी सहित अन्य ऐसी फ्राड छह कंपनियों के बारे में भी पुलिस जानकारी इकट्ठा कर रही है।
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जमीन की फर्जी रजिस्ट्री, प्रोजेक्ट में निवेश के नाम पर कार व गोल्ड दिलाने से लेकर देश विदेश तक टूर कराने का झांसा देकर अरबों की ठगी करने वाली शाइन सिटी की जांच आईओडब्ल्यू भी कर रही है, हालांकि कमिश्नरेट पुलिस ने भी अब अपने स्तर से जांच आगे बढ़ा दिया है। धोखाधड़ी सहित अन्य आरोपों में 2018 से फरार 75-75 हजार के इनामी साइन सिटी के सीएमडी राशिद नसीम व एमडी आसिफ नसीम दोनों भाईयों पर वाराणसी व लखनऊ में 75-75 हजार का इनाम भी घोषित है। शाइन सिटी पर कैंट थाने में 32 मुकदमे दर्ज हैं।
शिवपुर में खोला था कार्यालय
प्रयागराज के करैली निवासी शाइन सिटी कंपनी के सीएमडी राशिद नसीम और एमडी आसिफ नसीम ने शिवपुर स्थित सेंट्रल जेल रोड पर कार्यालय खोला था और इसके बाद दोनों भाईयों ने प्रोजेक्ट में निवेश कराने और एक ही जमीन को कई लोगों को रजिस्ट्री कराने, अधिक प्लाट बिकवाने पर गोवा, बैंकाक, मलेशिया की सैर कराने से लेकर कार व बुलेट तक उपहार में देने की स्कीम के बहाने लोगों के साथ धोखाधड़ी की। शिक्षकों, चिकित्सकों और अन्य कई लोगों का अरबों लेकर फरार सीएमडी-एमडी के बारे में पुलिस को कोई ठोस जानकारी नहीं है।
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करीबी को दिल्ली से किया गिरफ्तार
वाराणसी में 25-25 हजार रुपये और लखनऊ में 50-50 हजार रुपये का नाम दोनों भाईयों पर रखा गया। पिछले साल पुलिस ने सीएमडी-एमडी के कर्ताधर्ता कंपनी में निदेशक की भूमिका में रहने वाले लक्सा निवासी अमिताभ श्रीवास्तव को नई दिल्ली स्थित बसंतकुुंज से गिरफ्तार किया था। पुलिस की पूछताछ में अमिताभ श्रीवास्तव ने यह जानकारी दी थी कि सीएमडी-एमडी दोनों भाई दुबई में हीरा और होटल व्यवसाय से जुड़ गए हैं।
धोखाधड़ी के दो मुकदमे वाले भी पुलिस के रडार पर
जमीन की खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी करने वाले कालोनाइजरों और कंपनियों के एजेंटों की कुंडली पुलिस खंगाल रही है। पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जिनके खिलाफ थाने में दो से तीन मुकदमे भी धोखाधड़ी के दर्ज हैं, उनके रिकार्ड फिर से नए सिरे से खंगाले जाए। यही नहीं, प्लाट और फ्लैट मामले में पीड़ितों की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र पर तत्काल जांच कर रिपोर्ट लगाएं।
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