आकाश ने बताया कि सूरज जब बच्चे को देखने के लिए गया तो उसे बताया गया कि 17 अगस्त को बेटा हुआ है। परिवार के लोगों ने एनआईसीयू में जाकर बच्चे को देखने की इच्छा जताई, लेकिन उन्हें वहां जाने से रोक दिया गया। इसके बाद परिजनों को अस्पताल के दस्तावेज में भी गड़बड़ी नजर आई। कागज पर पहले मेल लिखा था, जिसे काटकर फीमेल कर दिया गया था। इसे लेकर परिजनों ने सवाल उठाते हुए बच्चा बदलने की आशंका जताई और कार्रवाई की मांग की।
वहीं, एमसीएच विंग के सीएमएस डॉ. आरएन विश्वकर्मा ने बच्चा बदलने के आरोप को खारिज किया। उन्होंने बताया कि महिला ने लड़की को जन्म दिया था और ओटी के बाहर उसके पिता को बच्ची गोद में दी गई थी। इसकी फोटो भी मौजूद है।
उन्होंने बताया कि एनआईसीयू में ले जाने के दौरान पैरामेडिकल स्टाफ से कागज पर गलती से मेल लिख दिया गया था। बाद में इसे सही करते हुए फीमेल किया गया। इसकी जानकारी परिजनों को भी दी गई थी। एमसीएच विंग का संचालन पीपीपी मॉडल पर किया जा रहा है और इसकी देखरेख की जिम्मेदारी हेरिटेज मेडिकल कॉलेज के पास है।