सीताराम के मुताबिक, उन्होंने पहली बार सात हजार और दूसरी बार 15 हजार रुपये दिए। उनका आरोप है कि दोनों बार उक्त व्यक्ति ने उनके सामने ही थाने पर तैनात उपनिरीक्षक को रुपये दिए। बाद में और रुपये की मांग की गई, लेकिन उन्होंने आर्थिक असमर्थता जताते हुए रुपये देने से इनकार कर दिया।
मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस महकमे में भी चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। थानाध्यक्ष रंजीत विश्वकर्मा ने उपनिरीक्षक पर रुपये लेने के आरोप को निराधार बताया।
बताया कि 22 जुलाई को रास्ते के विवाद को लेकर हुई मारपीट के मामले में सुधा चौहान की तहरीर पर तीन महिलाओं समेत छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की विवेचना प्रचलित है और विवेचना में सभी आरोपियों के विरुद्ध आरोप प्रमाणित हो रहे हैं। वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी और जांच में तथ्य सामने आने के बाद आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।