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Akshaya Tritiya 2026: अक्षय योग में अक्षय फल के लिए श्रद्धालुओं ने किया स्नान-दान, शुभ मुहूर्त में की खरीदारी

Mon, 20 Apr 2026 10:55 AM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Akshaya Tritiya 2026: काशी में सोमवार की सुबह से गंगा घाटों पर भक्तों की कतारें लगी रहीं। लोगों ने गंगा स्नान के बाद दान-पुण्य किया। वहीं आज से शुभ कार्य की शुरुआत, मांगलिक कार्य और शादियों की धूम मची है। 
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अक्षय तृतीया पर उपनयन संस्कार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अक्षय तृतीया की तिथि रविवार की दोपहर में ही लग गई लेकिन उदया तिथि का मान होने से अक्षय तृतीया सोमवार यानी आज मनाई जा रही है। हालांकि, कुछ लोगों ने तिथि की शुरुआत होने पर ही बटुकों का उपनयन संस्कार, पूजन अर्चन और खरीदारी की। इस बार इस तिथि पर 10 साल बाद नौ योग और पांच शुभ मुहूर्त में अक्षय फल बरस रहा है। श्रद्धालु सोमवार की सुबह से काशी के गंगा घाटों पर उमड़ने लगे। इस दौरान लोगों ने गंगा स्नान और दान-पुण्य किया। ऐसे में आज शुभ कार्य की शुरुआत, मांगलिक कार्य और शादियों की धूम मची है। अक्षय फल के लिए भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जा रही है। घरेलू सामग्री से लेकर आभूषणों की खरीदारी लोग कर रहे हैं।

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अक्षय तृतीया स्वयंसिद्ध मुहूर्तों में एक है। सोमवार को घाटों पर सुबह से ही स्नान करने के लिए भीड़ लगी है। श्रद्धालु गंगा स्नान कर तीर्थ पुरोहितों को दान-दक्षिणा देकर अक्षय फल की कामना कर रहे हैं। चांदी, दूध, चावल, शंख या सफेद मोती, गेहूं, इत्र, रेशमी वस्त्र, मसूर दाल, चने के दाल, हल्दी आदि दान में दे रहे हैं। 

उधर, बाजार में खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ रही है। लोग सुबह, दोपहर और शाम के मुहूर्त और राशि के अनुसार खरीदारी भी कर रहे हैं। सोना, चांदी, कामधेनु गाय की मूर्ति खरीद रहे हैं। नया व्यापार या निवेश शुरू कर रहे हैं। तांबे के बर्तन, लक्ष्मी गणेश, यंत्र, धनिया, नमक, वाहन आदि ले रहे हैं।

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इस योग में मनाई गई अक्षय तृतीया
ज्योतिषचार्यों के अनुसार इस बार अक्षय तृतीया सौभाग्य, आयुष्मान, घर, स्थिर, त्रिपुष्कर, राजयोग, मालव्य, शुभ, नव योग में मनाई गई। रोहिणी नक्षत्र रहा। चंद्रमा और सूर्य अपने उच्च राशि में रहे। सूर्य और चंद्रमा दोनों के प्रभाव से अक्षय योग बना। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार अक्षय तृतीया तिथि रविवार को दोपहर में 1:01 बजे लग गई। लेकिन, सोमवार को दिन में 10:39 तक रही।

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धर्मसंघ में 1100 बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार
धर्मसंघ शिक्षा मंडल दुर्गाकुंड में 1100 बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार हुआ। पूर्वांचल के अलावा आठ राज्यों से बटुकों ने पंजीकरण करवाया था। धर्मसंघ के महामंत्री पं. जगजीतन पांडेय ने बताया कि 100 से अधिक वेदियां बनाई गई थीं। सुबह सात बजे से अनुष्ठान शुरू हुआ। इस दौरान बटुकों को संगीत की शिक्षा की भी शुरुआत हुई। दक्षिणामूर्ति मठ अस्सी में भी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद के सानिध्य में अनुष्ठान हुआ।
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