इस योग में मनाई गई अक्षय तृतीया
ज्योतिषचार्यों के अनुसार इस बार अक्षय तृतीया सौभाग्य, आयुष्मान, घर, स्थिर, त्रिपुष्कर, राजयोग, मालव्य, शुभ, नव योग में मनाई गई। रोहिणी नक्षत्र रहा। चंद्रमा और सूर्य अपने उच्च राशि में रहे। सूर्य और चंद्रमा दोनों के प्रभाव से अक्षय योग बना। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार अक्षय तृतीया तिथि रविवार को दोपहर में 1:01 बजे लग गई। लेकिन, सोमवार को दिन में 10:39 तक रही।
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धर्मसंघ में 1100 बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार
धर्मसंघ शिक्षा मंडल दुर्गाकुंड में 1100 बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार हुआ। पूर्वांचल के अलावा आठ राज्यों से बटुकों ने पंजीकरण करवाया था। धर्मसंघ के महामंत्री पं. जगजीतन पांडेय ने बताया कि 100 से अधिक वेदियां बनाई गई थीं। सुबह सात बजे से अनुष्ठान शुरू हुआ। इस दौरान बटुकों को संगीत की शिक्षा की भी शुरुआत हुई। दक्षिणामूर्ति मठ अस्सी में भी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद के सानिध्य में अनुष्ठान हुआ।