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Akshaya Tritiya 2024: 23 साल बाद अक्षय तृतीया पर नहीं गूंजेगी शहनाई, शुभ कार्यों पर भी लगा विराम

Mon, 06 May 2024 09:25 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

शुक्र और गुरु अस्त होने के कारण शुभ कार्यों पर विराम लगा हुआ है। ऐसे में अक्षय तृतीया पर इस बार शहनाई नहीं गूंजेगी। तृतीया तिथि का लोप होने के कारण केवल सोना और वाहन खरीदने मुहूर्त का है। 
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अक्षय तृतीया 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अक्षय तृतीया पर 23 साल बाद न तो शहनाई गूंजेगी और ना ही कोई मांगलिक कार्य होंगे। अबूझ मुहूर्त होने के बाद भी शुक्र और गुरु के अस्त होने के कारण सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लगा हुआ है। वहीं, तृतीया तिथि का लोप होने के कारण 14 दिनों का ही पक्ष रहेगा। सोना और वाहन खरीदने के लिए स्थिर लग्न में शुभ मुहूर्त मिल रहा है।

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अक्षय तृतीया पर विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि शुभ-मांगलिक कार्यों को करने के लिए मुहूर्त की जरूरत नहीं होती है। लगभग 23 सालों के बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब अक्षय तृतीया के दिन विवाह या मांगलिक कार्यों का कारक शुक्र और गुरु तारा अस्त होने से इस दिन विवाह आदि का मुहूर्त नहीं बन रहा है। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि अक्षय तृतीया 10 मई को सुबह 05:31 बजे लग रही है और अगले दिन 4:35 बजे तक रहेगी। इसके पहले 2001 में अक्षय तृतीया पर गुरु और शुक्र अस्त हुए थे। 

इस बार 29 अप्रैल को रात 11:13 पर शुक्र अस्त हो चुके हैं और छह मई की रात 11:01 बजे गुरु अस्त हो जाएंगे। करीब 66 दिनों के लिए विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, उद्यापन आदि मांगलिक कार्य पर रोक लग जाएगी। इसके कारण मई और जून में विवाह के लिए मुहूर्त नहीं मिलेंगे। गुरु का उदय तीन जून को और शुक्र का उदय 28 जून को रात 07:52 मिनट बजे होगा।

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विवाह के कारक हैं शुक्र और गुरु

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, विवाह के लिए कुंडली मिलान और गुण दोष का मिलान किया जाता है। इसके अलावा गुरु और शुक्र ग्रह को विवाह का कारक ग्रह माना गया है। आकाश मंडल में गुरु और शुक्र ग्रह उदय हों तो ही विवाह के शुभ मुहूर्त होते हैं। अगर ये दोनों ग्रह अस्त हों तो विवाह के लिए मुहूर्त नहीं होता है। दोनों ग्रहों के अस्त होने से मई-जून में विवाह की शहनाइयां नहीं गूजेंगी।

वसंत का समापन और ग्रीष्म ऋतु का होगा आरंभ
अक्षय तृतीया के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करके भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करने का प्रावधान है। नैवेद्य में जौ व गेहूं का सत्तू, ककड़ी और चने की दाल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद फल, फूल, पात्र और वस्त्र आदि दान करके ब्राह्मणों को दक्षिणा दी जाती है। मान्यता है कि इस दिन सत्तू अवश्य खाना चाहिए और नए वस्त्र और आभूषण पहनने चाहिए। गौ, भूमि, स्वर्ण पात्र आदि का दान भी किया जाता है। यह तिथि वसंत ऋतु के अंत और ग्रीष्म ऋतु का प्रारंभ का दिन भी है इसलिए अक्षय तृतीया के दिन जल से भरे घड़े, कुल्हड, सकोरे, पंखे, खडाऊं, छाता, चावल, नमक, घी, खरबूजा, ककड़ी, शक्कर, साग, इमली, सत्तू आदि गर्मी में लाभकारी वस्तुओं का दान पुण्यकारी माना गया है।
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नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम ने लिया था अवतार

भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि की युगादि तिथियों में गणना होती है। सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ है। भगवान विष्णु ने नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम जी के रूप में इसी तिथि का अवतार लिया था। इस दिन श्री बद्रीनाथ जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है और श्री लक्ष्मी नारायण के दर्शन किए जाते हैं। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनारायण के कपाट भी इसी तिथि से ही पुनः खुलते हैं। वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी जी मंदिर में भी केवल इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं।

वर्जित कार्य
विवाह, गृह प्रवेश, बावड़ी, भवन, कुआं, तालाब, बगीचा, जल के बड़े हौदे का निर्माण, व्रत का प्रारंभ, उद्यापन, प्रथम उपाकर्म, नई बहू का गृह प्रवेश, देवस्थापन, दीक्षा, उपनयन, जडुला उतारना, गृह प्रवेश, जनेऊ, प्राण प्रतिष्ठा, भूमिपूजन का आरंभ आदि कार्य नहीं करें। वधू का द्विरागमन शुक्र के अस्त काल में वर्जित है।

अक्षय तृतीया पर ये होंगे कार्य
अन्नप्राशन, सीमंतोनयन, पुंसवन, जातकर्म, दुकान, वाहन क्रय विक्रय और नामकरण होंगे

खरीद सकेंगे सोना और वाहन
अक्षय तृतीया पर सोना और वाहन खरीदने का मुहूर्त दिन में 12:23 बजे के बाद सिंह लग्न और मृगशिरा नक्षत्र में मिलेगा।
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