नागा साधु और संत आध्यात्म का शृंगार कर सिर्फ धर्म की रक्षा और विस्तार ही नहीं करते, बल्कि देश सेवा में भी अपनी भूमिका निभाते हैं। ये अखाड़े देशभर में निशुल्क कॉलेज, अस्पताल सहित अन्य सेवाएं देते हैं।
संस्कृत पाठशालाओं के अलावा इन अखाड़ों के यूजी-पीजी कॉलेज के साथ ही मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज भी चलते हैं। उनकी आय का जरिया सिर्फ दान-दक्षिणा ही नहीं, आश्रम व दुकान के आने वाले किराये और खेती से होने वाली आय भी है।
धर्म रक्षा और सनातन को बढ़ाने के लिए आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित अखाड़े चार तीर्थ नदियों के तट पर लगने वाले अर्धकुंभ, कुंभ और महाकुंभ में पूरे राजसी अंदाज में शामिल होकर आध्यात्मिक ऊर्जा अर्जित करते हैं। हर शहरों में दर्जनों अखाड़े हैं, जहां नागा साधु-संन्यासी रहकर पूजन-अर्चन और अनुष्ठान में लगे रहते हैं।
हर अखाड़ों के पास कई एकड़ जमीनें हैं। जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गिरि महाराज ने बताया कि अखाड़ों के विभिन्न आयामों से होने वाली आय से मठ, मंदिरों, अखाड़ों और आश्रमों के निर्माण-जीर्णोद्धार आदि कार्य होते हैं। इसके साथ सामाजिक सरोकार के कार्य होते हैं, ताकि गरीबों के बच्चों की पढ़ाई, असहायों लोगों का इलाज आदि सेवाएं हो सकें।