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जनसेवा: अखाड़ों के देशभर में चलते हैं कॉलेज और अस्पताल, जानें- किन शहरों में है सेवा का साम्राज्य

Mon, 10 Mar 2025 02:25 PM IST
प्रगति चंद हीरालाल चौरसिया, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।

सार

अखाड़ों के देशभर में निशुल्क कॉलेज और अस्पताल चलते हैं। इनकी कमाई का जरिया दान के अलावा खेती, दुकान और आश्रम का किराया भी है। ये सामाजिक सरोकार से भी जुड़कर सेवा करते हैं। 
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अखाड़े। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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नागा साधु और संत आध्यात्म का शृंगार कर सिर्फ धर्म की रक्षा और विस्तार ही नहीं करते, बल्कि देश सेवा में भी अपनी भूमिका निभाते हैं। ये अखाड़े देशभर में निशुल्क कॉलेज, अस्पताल सहित अन्य सेवाएं देते हैं। 

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संस्कृत पाठशालाओं के अलावा इन अखाड़ों के यूजी-पीजी कॉलेज के साथ ही मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज भी चलते हैं। उनकी आय का जरिया सिर्फ दान-दक्षिणा ही नहीं, आश्रम व दुकान के आने वाले किराये और खेती से होने वाली आय भी है। 

धर्म रक्षा और सनातन को बढ़ाने के लिए आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित अखाड़े चार तीर्थ नदियों के तट पर लगने वाले अर्धकुंभ, कुंभ और महाकुंभ में पूरे राजसी अंदाज में शामिल होकर आध्यात्मिक ऊर्जा अर्जित करते हैं। हर शहरों में दर्जनों अखाड़े हैं, जहां नागा साधु-संन्यासी रहकर पूजन-अर्चन और अनुष्ठान में लगे रहते हैं। 
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हर अखाड़ों के पास कई एकड़ जमीनें हैं। जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गिरि महाराज ने बताया कि अखाड़ों के विभिन्न आयामों से होने वाली आय से मठ, मंदिरों, अखाड़ों और आश्रमों के निर्माण-जीर्णोद्धार आदि कार्य होते हैं। इसके साथ सामाजिक सरोकार के कार्य होते हैं, ताकि गरीबों के बच्चों की पढ़ाई, असहायों लोगों का इलाज आदि सेवाएं हो सकें। 

अखाड़े असहायों की शादी-विवाह भी करवाते हैं। जूना व निरंजनी अखाड़े गरीबों की बेटियों की शादी करवाते हैं। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के रवींद्र गिरि महाराज व निरंजनी के श्रीमहंत रवींद्रपुरी ने बताया कि मठ और मंदिरों के दान के अलावा आश्रम, दुकान और खेती भी हमारी आय का माध्यम है।   
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किस अखाड़े की कितनी है जमीन व शाखाएं

अखाड़े        शाखाएं       जमीन (एकड़)
जूना             7000          20000
आवाहन       500           8000
निरंजनी       2000         100000
महानिर्वाणी   80000      100000
अग्नि            400           50000
आनंद         100            2000
अटल         200             5000
(अखाड़ों के अनुसार)
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