अग्निपथ के विरोध में सोशल मीडिया पर चलो बनारस के स्लोगन के साथ प्रदर्शनकारियों के मंसूबे भांप पाने में पुलिस का खुफिया तंत्र पूरी तरह नाकाम रहा। देर रात तैयारियों के बाद भी पुलिस सीमा चौकसी की व्यवस्था को संभाल नहीं पाई। यही कारण रहा कि दिन निकलने के साथ ही प्रदर्शनकारी सड़कों पर निकले और पूरी व्यवस्था पर ही उन्होंने कब्जा जमा लिया।
इस दौरान पुलिस और प्रशासन कुछ समय के लिए असहाय बन कर रहा गया। हालांकि दोपहर बाद पुलिस ने अपनी स्थिति मजबूत करते हुए स्थिति नियंत्रित की, मगर इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने रोडवेज, रेलवे सहित कई जगहों पर संपत्तियों का नुकसान के साथ ही आधे से ज्यादा शहर को ही कब्जे में रखा।
दरअसल, बृहस्पतिवार को ही पुलिस व प्रशासन को इनपुट मिला था कि सोशल मीडिया पर सेना भर्ती के लिए लागू नए नियम अग्निपथ के विरेध में बनारस चलो का स्लोगन के साथ एक गुपचुप मुहिम शुरू हुई है। हालांकि सूचना के बाद मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने प्रशासन व पुलिस के आला अधिकारियों के साथ बैठक कर ठोस रणनीति तैयार कराई। इसमें जिले की सीमाओं को सील करने के साथ ही छावनी क्षेत्र में पुख्ता सुरक्षा का प्लान बनाया गया।
इसके बावजूद सुबह नौ बजे तक सड़कों पर प्रदर्शनकारी डट गए थे और रोडवेज, रेलवे के साथ ही सड़क पर चल रहे वाहनों को उन्होंने जमकर निशाना बनाया। जहां प्रदर्शनकारी रहे, वहां उनकी ही मनमानी रही और एक समय के लिए पूरा शहर ही मानो रुक सा गया था। हालांकि प्रदर्शनकारियों की सूचना के बाद पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश और जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने मामले की गंभीरता को समझते हुए कमान हाथ में ली। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को खदेड़ कर हर जगह से हटाया गया।