डीजल रेल कारखाने (डीरेका) के सीनियर सेक्शन इंजीनियर संतोष कुमार सिंह ने गुरुवार की रात कैंपस स्थित अपने आवास में पहले अपनी बेटी साक्षी उर्फ वैष्णवी (11) की गला दबाकर हत्या की और फिर खुद आंगन में पेड़ से फांसी लगाकर जान दे दी। शुक्रवार की सुबह इंजीनियर के भाई कमलेश ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके से सुसाइड नोट बरामद किया है। जिसमें लिखा है कि ‘मैंने अपना सब कुछ खो दिया था, मेरे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं था। साक्षी बेटा होती तो उसे पाल लेता लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं है, मैं उसे भी साथ ले जा रहा हूं।’ पुलिस का कहना है कि पिछले एक साल में इंजीनियर की पत्नी, पिता और बेटे की मौत हो गई थी, जिससे वह गहरे अवसाद में थे।
बलिया के दोकटी थाना क्षेत्र के करन छपरा निवासी संतोष कुमार सिंह (एसके सिंह) डीरेका के बी शाप के हैवी वेल्ट शाप में सेक्शन इंजीनियर पद पर तैनात थे। वे डीरेका परिसर की जलालीपट्टी कॉलोनी के फ्लैट नंबर 488 ए में वर्ष 2008 से रहते थे। पिछले साल दिसंबर में उनके दो पुत्रों में छोटे विवेक उर्फ नंदन की गाल ब्लैडर की बीमारी से मौत हो गई। उसके बाद इस साल फरवरी में पिता गोवर्धन और अप्रैल में पत्नी कुमुद की कैंसर से मौत हो गई। तब से वह अपनी ग्यारह साल की बेटी वैष्णवी उर्फ साक्षी के साथ यहां रह रहे थे। वैष्णवी सेंट जॉन्स
स्कूल डीरेका में कक्षा छह में पढ़ती थी। जबकि बड़ा बेटा अभिषेक बीटेक करने के बाद गाजियाबाद में रहकर गेट की तैयारी कर रहा है। कुछ महीनों के अंदर परिवार के तीन-तीन लोगों की मौत से उन्हें गहरा सदमा लगा था। बेटी और एक बेटा के साथ होने के बावजूद वह बेहद एकाकी महसूस करते थे। लिहाजा, उन्होंने चार महीने पहले जल निगम में ठेकेदारी करने वाले अपने छोटे भाई कमलेश और उसके परिवार को भी अपने यहां ही बुला लिया। तब से छोटे भाई का परिवार भी साथ रहता था।
गुरुवार की रात सबने एक साथ खाना खाया। रात करीब साढ़े नौ बजे एसके सिंह बेटी साक्षी के साथ अपने कमरे में सोने चले गए। कमलेश भी परिवार के साथ दूसरे कमरे में सोने चले गए। रात में किसी समय एसके सिंह ने बेटी की गला दबकर हत्या कर दी और खुद आंगन में आम के पेड़ से नायलान की रस्सी के सहारे फांसी पर लटक गए। शुक्रवार की सुबह करीब पांच बजे कमलेश और उनकी पत्नी बबली सिंह ने आंगन में पेड़ से लटके एसके सिंह को देखा तो पुलिस को 100 नंबर पर सूचना दी। इस बीच आसपास के लोग
भी जुट गए। पुलिस ने मौके से सुसाइड नोट बरामद किया। एसओ मंडुवाडीह फरीद अहमद का कहना है कि पिछले एक साल में परिवार में हुई तीन मौतों के बाद से इंजीनियर अवसाद में थे। उन्होंने पहले बेटी को मारा और फिर अपनी जान दी। उधर, छोटे भाई कमलेश ने बताया कि दोनों कमरों में कूलर चल रहा था, जिससे बगल के कमरे की आवाज उनके कमरे तक नहीं आई। घटना की सूचना गाजियाबाद में रह रहे एसके सिंह के बेटे अभिषेक को दी गई। परिवार के लोगों और परिचितों की घटनास्थल पर भीड़ लगी थी।