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जिंदगी ढर्रे पर लौटने में लगेंगे कम से कम दस दिन

Wed, 31 Aug 2016 01:29 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
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गाद
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सड़कों-कॉलोनियों से तो गंगा नीचे उतर गई लेकिन बाढ़ की गाद (सिल्ट) से घाटों का जनजीवन अब भी ठहरा हुआ है। सुबह-ए-बनारस और गंगा आरती के पर्यटन पर भी जबरदस्त असर पड़ा है। सुबह-ए-बनारस के मोहक नजारे का दीदार और अस्सी घाट पर हर सुबह प्रभाती रागों के साथ सजने वाली संगीत महफिल का आनंद, दोनों के लिए लोग तरस गए हैं। घाट किनारे के बाशिंदों की रोजी-रोटी ठप है। जिंदगी ढर्रे पर लौटने में कम से कम अभी दस दिन और लग सकते हैं।
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सुबह-ए-बनारस की महफिल अभी नगवा रोड पर स्थित उडुपि मंदिर में लग रही है। जिला सांस्कृतिक समिति के पदाधिकारियों और तीर्थपुरोहितों का कहना है कि अगर दोबारा तेज बारिश नहीं हुई और जल स्तर इसी तरह घटता रहा तो भी अभी घाट पर गंगा आरती और सुबह-ए-बनारस की महफिल गुलजार होने में दस दिन से अधिक वक्त लग सकता है। प्राचीन दशाश्वमेध घाट की ऊपरी सीढ़ियों से गंगा धीरे-धीरे उतर रही है। मंगलवार को वनखंडी आश्रम और सीढ़ियों पर पटी गाद की पंप लगाकर सफाई का काम तेज कर दिया गया। अभी इस घाट की दर्जन भर दूकानों के साथ ही शीतला मंदिर डूबा हुआ है और गाद भरी है। गंगोत्री सेवा समिति के अध्यक्ष पं. किशोरी रमण दुबे बाबू महाराज का कहना है कि अभी गंगा आरती छत पर ही होगी।

छत पर गंगा आरती होने से श्रद्धालु गिनती के ही पहुंच पा रहे हैं। इसी तरह दशाश्वमेध घाट पर जहां शाम ढलते ही गंगा सेवा निधि की ओर से होने वाली गंगा आरती अभी तीसरी मंजिल पर हो रही है। सामान्य दिनों में यहां गंगा आरती में देश-दुनिया के लोग घाट की सीढ़ियों, मढ़ियों से लेकर मंदिरों, भवनों की छतों और गंगा की बीच लहरों पर इतराने वाली नावों पर खचाखच उमड़ पड़ते हैं, वहीं इस समय गिनेचुने लोग ही पहुंच रहे हैं। निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र कहते हैं कि इस बार सिल्ट अधिक फैली है। घाट के ब्रह्मेश्वर महादेव, नागेश्वर महादेव के अलावा अन्य मंदिरों में गाद भरी है।
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हालांकि संस्था की ओर से दो पंप लगाकर दिन भर गाद की धुलाई कराई जा रही है लेकिन अभी इस घाट पर भी गंगा आरती शुरू होने में 10 दिन से अधिक लग सकता है। उधर, अस्सी घाट पर तो अभी पंप लगा ही नहीं है। वहां सुबह -ए-बनारस के मंच स्थल से लेकर यज्ञ, हवन कुंड और आरती स्थल तक गाद में डूबा हुआ है। नगर निगम के अलावा इस घाट की सफाई का जिम्मा संभालने वाली संस्था सुलभ इंटरनेशनल को भी सिल्ट की सफाई कराने के लिए जिला सांस्कृतिक समिति ने कहा है। समिति के पदाधिकारी अजय गुप्ता का कहना है कि तेजी से काम हुआ तो भी यहां 10 दिन से अधिक लगेंगे।    
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