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स्वास्थ्य केंद्रों को गोद तो ले लिया पर ‘परवरिश’ भूले जनप्रतिनिधि

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मुख्यमंत्री के आह्वान पर जनप्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य केंद्रों को गोद तो ले लिया है, लेकिन उसकी सुध नहीं ले रहे हैं। हालत यह है कि अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों तक जाने वाली सड़कों की स्थिति भी ठीक नहीं है। ऑक्सीजन प्लांट लगने के बाद उसे चलाने के लिए बिजली आपूर्ति और ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाना भी चुनौती है। चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ की कमी भी बनी हुई है। इसके अलावा ऑक्सीजन पाइपलाइन तक नहीं बिछ सकी है। शहरी और ग्रामीण इलाकों में सामुदायिक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उप केंद्र मिलाकर करीब 50 से अधिक हैं। दूसरी लहर में जिस तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आईं, उससे सबक लेकर न केवल सरकारी, निजी अस्पतालों बल्कि स्वास्थ्य केंद्रों के हालात सुधारने का निर्णय लिया गया है।
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सीएचसी नरपतपुर :
न पाइपलाइन बिछी, न ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ी
केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय द्वारा गोद ली गई सीएचसी में केवल ऑक्सीजन प्लांट के लिए प्लेटफार्म ही बन पाया है। बिजली आपूर्ति के लिए ट्रांसफार्मर की क्षमता भी नहीं बढ़ाई गई है। अधीक्षक डॉ. राजनाथ के मुताबिक, स्त्री रोग, बाल रोग, सर्जन, एनेस्थेसिस्ट के साथ ही वार्ड ब्वाय पद भी रिक्त है।
पीएचसी चिरईगांव :
स्त्री रोग विशेषज्ञ, बच्चों के डॉक्टर नहीं
प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने पीएचसी गोद लेने के बाद एक दिन दौरा किया। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के जेई को नाली, टीनशेड, इंटरलॉकिंग का निर्माण कराने को कहा था, लेकिन अब तक काम नहीं शुरू हुआ। स्त्री रोग डॉक्टर और बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. अमित सिंह का कहना है कि मंत्री के निर्देश पर एस्टिमेट बनाने का काम शुरू हो गया है।
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सीएचसी दुर्गाकुंड :
स्वास्थ्य केंद्र तक जाने वाली सड़क खराब
महापौर मृदुला जायसवाल नेे शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दुर्गाकुंड को गोद लिया है। पिछले दिनों दौरा भी किया था। हालत यह है कि केंद्र जाने वाला रास्ते पर जलभराव के साथ ही जगह-जगह सड़क क्षतिग्रस्त है। परिसर में गंदगी भी है।
सीएचसी मिसिरपुर
जांच की सुविधा नहीं, विशेषज्ञों की कमी बरकरार
रोहनिया विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह के गोद लिए सीएचसी पर लैब टेक्नीशियन न होने से कोई जांच नहीं हो पा रही है। अधीक्षक डॉ. आरबी सिंह ने बताया कि लैब टेक्नीशियन के रामनगर शास्त्री अस्पताल में अटैच होने से जांच संभव नहीं है। स्वास्थ्य केंद्र पर सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थेसिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। रास्ता भी ठीक नहीं है।
पीएचसी कोनिया
बेड पर चादर नहीं, स्ट्रेचर की हालत खराब
शहर दक्षिणी के विधायक और राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी के गोद लिए पीएचसी कोनिया की स्थिति भी बद से बदतर है। अस्पताल में रखे बेड पर न गद्दे हैं, न ही चादर हैं। मरीजों को ले जाने के लिए स्ट्रेचर भी जर्जर हालत में हैं। नियमित डॉक्टर और स्टाफ नर्स की मौजूदगी न होने की वजह से भी लोगों को परेशानी होती है।
वर्जन
जनप्रतिनिधियों द्वारा स्वास्थ्य केंद्रों को गोद लेने की पहल के बाद अब स्वास्थ्य केंद्रों पर सुविधाओं की सूची भी तैयार कराई जा रही है। 15 अगस्त तक सभी सुविधाएं, चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ की कमी आदि को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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-डॉ. वीबी सिंह सीएमओ
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