पुलिस की पाठशाला में मौजूद अधिकारी, शिक्षक व विद्यार्थी।
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आज के समय में चाकू, हथियार से नहीं बल्कि लोगों को मोबाइल से लूटा जा रहा है। जरा सी चूक होने पर साइबर अपराधी कुछ ही सेकेंड में बैंक खाता खाली कर देते हैं। सोशल इंजीनियरिंग को साइबर जालसाजों ने हथियार बना लिया है। इतनी जागरूकता और सतर्कता के बावजूद अच्छे और शिक्षित वर्ग के लोग भी सोशल इंजीनियरिंग के बिछाए जाल में फंसते जा रहे हैं। 25 करोड़ रुपये पिछले साल देशभर में लोगों ने साइबर अपराध में खो दिए हैं। यह बातें एसीपी सारनाथ, साइबर क्राइम विदुष सक्सेना ने यूपी कॉलेज के मल्टीपर्पज हॉल में बुधवार को पुलिस की पाठशाला में कहीं।
उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि सोशल इंजीनियरिंग साइबर अपराधियों की एक तकनीक है। धोखेबाज ईमेल (फिशिंग), कॉल (विशिंग) या मैसेज के जरिये फर्जी बैंक अधिकारी, कर्मचारी या परिचित बनकर संवेदनशील जानकारी (पासवर्ड, बैंक विवरण, ओटीपी) हासिल करते हैं। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर ढेरों फेंक अकाउंट बने हैं। अपनी निजी जानकारियां सोशल मीडिया पर सार्वजनिक न करें।
साइबर जालसाजों को डेटा की जरूरत होती है। यदि आपका डेटा उनके हाथ लगा तो किसी न किसी बहाने वे आपका बैंक खाता खाली कर देते हैं। एसीपी साइबर ने विद्यार्थियों से कहा कि जीमेल, ईमेल आईडी पासवर्ड हमेशा यूनिक होना चाहिए। सोशल मीडिया के लिए जो भी ईमेल आईडी बनाएं, उसका कभी भी बैंक खाते में इस्तेमाल न करें। बैंक के कामकाज के लिए नई ईमेल आईडी बनाएं। इस दौरान एसीपी ने यातायात और मिशन शक्ति से जुड़ी जानकारियां भी विद्यार्थियों से साझा की।