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Varanasi: सोशल इंजीनियरिंग के जरिये बैंक खातों पर अटैक कर रहे हैं साइबर ठग, विद्यार्थियों को दी गईं जानकारियां

Thu, 26 Feb 2026 03:26 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

एसीपी साइबर विदुष सक्सेना ने यूपी कॉलेज में पुलिस की पाठशाला में विद्यार्थियों को खास जानकारियां दीं। उन्होंने छात्र- छात्राओं को बताया कि साइबर ठग सोशल इंजीनियरिंग के जरिये बैंक खातों पर अटैक कर रहे हैं। 
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पुलिस की पाठशाला में मौजूद अधिकारी, शिक्षक व विद्यार्थी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज के समय में चाकू, हथियार से नहीं बल्कि लोगों को मोबाइल से लूटा जा रहा है। जरा सी चूक होने पर साइबर अपराधी कुछ ही सेकेंड में बैंक खाता खाली कर देते हैं। सोशल इंजीनियरिंग को साइबर जालसाजों ने हथियार बना लिया है। इतनी जागरूकता और सतर्कता के बावजूद अच्छे और शिक्षित वर्ग के लोग भी सोशल इंजीनियरिंग के बिछाए जाल में फंसते जा रहे हैं। 25 करोड़ रुपये पिछले साल देशभर में लोगों ने साइबर अपराध में खो दिए हैं। यह बातें एसीपी सारनाथ, साइबर क्राइम विदुष सक्सेना ने यूपी कॉलेज के मल्टीपर्पज हॉल में बुधवार को पुलिस की पाठशाला में कहीं।

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उन्होंने छात्र-छात्राओं से कहा कि सोशल इंजीनियरिंग साइबर अपराधियों की एक तकनीक है। धोखेबाज ईमेल (फिशिंग), कॉल (विशिंग) या मैसेज के जरिये फर्जी बैंक अधिकारी, कर्मचारी या परिचित बनकर संवेदनशील जानकारी (पासवर्ड, बैंक विवरण, ओटीपी) हासिल करते हैं। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर ढेरों फेंक अकाउंट बने हैं। अपनी निजी जानकारियां सोशल मीडिया पर सार्वजनिक न करें। 

साइबर जालसाजों को डेटा की जरूरत होती है। यदि आपका डेटा उनके हाथ लगा तो किसी न किसी बहाने वे आपका बैंक खाता खाली कर देते हैं। एसीपी साइबर ने विद्यार्थियों से कहा कि जीमेल, ईमेल आईडी पासवर्ड हमेशा यूनिक होना चाहिए। सोशल मीडिया के लिए जो भी ईमेल आईडी बनाएं, उसका कभी भी बैंक खाते में इस्तेमाल न करें। बैंक के कामकाज के लिए नई ईमेल आईडी बनाएं। इस दौरान एसीपी ने यातायात और मिशन शक्ति से जुड़ी जानकारियां भी विद्यार्थियों से साझा की।

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एपीके फाइल और शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर ठगी

उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि अपने परिवार या सगे संबंधियों को जागरूक करें कि व्हाट्सएप पर अनजान नंबर से आए लिंक पर क्लिक न करें। शादी के कार्ड, चालान समेत अन्य तरह के आमंत्रण पत्र या लेटर एपीके फाइल में साइबर जालसाज भेजते हैं। उस एपीके फाइल को डाउनलोड करते ही मोबाइल हैक हो जाने से आपका सारा डेटा जालसाजों के पास पहुंच जाता है। 

इसके अलावा धन दोगुना करने और निवेश का लालच देकर भी इस समय लोगों को फंसाया जा रहा है। एसीपी साइबर विदुष सक्सेना ने कहा कि किसी तरह की ठगी होने पर 1930 पर कॉल करें। संबंधित थाने में साइबर हेल्प डेस्क पर जाएं। इस बीच छात्र-छात्राओं ने सोशल मीडिया पर बरतनी जाने वाली सावधानियां, शेयर ट्रेडिंग समेत अन्य साइबर सुरक्षा से जुड़े सवाल भी पूछे। धन्यवाद ज्ञापित प्रिंसिपल डीके सिंह ने किया।

सोशल इंजीनियरिंग से बचने के उपाय
एसीपी साइबर विदुष सक्सेना ने बताया कि पहले सत्यापन करें। किसी भी अनजान ईमेल, कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें। अनावश्यक जानकारी साझा न करें यानी बैंक या कोई कंपनी फोन पर पासवर्ड, पिन या ओटीपी नहीं मांगती है। जल्दबाजी से बचेें जैसे कि धोखेबाज आपको जल्दबाजी में फैसले लेने पर मजबूर करते हैं। सुरक्षा अपडेट के तहत अपने सभी डिवाइस अपडेट रखें, मजबूत पासवर्ड बनाए।
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