अदालत में आरोपी ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वादिनी को ब्याज समेत 1.23 लाख रुपये लौटाए जा चुके हैं और उसके ऊपर कोई रकम बकाया नहीं है। आरोपी ने मुकदमे को साजिश बताते हुए अग्रिम जमानत का अनुरोध किया।
अभियोजन की ओर से आरोपी की जमानत अर्जी का विरोध किया गया। अदालत ने पत्रावली और उपलब्ध तथ्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपी के खिलाफ मौजूदा मुकदमे के अलावा लालपुर-पांडेयपुर थाने में दो अन्य प्राथमिकी भी दर्ज हैं। इस तरह आरोपी के खिलाफ कुल तीन मुकदमों का आपराधिक इतिहास सामने आया।
अदालत ने अग्रिम जमानत अर्जी में आपराधिक इतिहास का उल्लेख नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया। न्यायालय ने आरोपी के खिलाफ दर्ज मुकदमों और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के बाद कुशाग्र श्रीवास्तव की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी गई।