काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के बाल रोग विभाग की नियोनेटोलॉजी इकाई द्व
बीएचयू अस्पताल में शनिवार को हुई कार्यशाला में उच्च जोखिम वाले नवजात शिशुओं की निगरानी के साथ ही उनके बेहतर इलाज पर चर्चा की गई। कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने बीएचयू अस्पताल से बाहर लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का आह्वान किया। साथ ही नवजात मृत्यु दर को समझने के साथ ही देखभाल के क्षेत्र में संस्थान को क्षेत्रीय आदर्श के रूप में विकसित करने की बात कही।
बाल रोग विभाग की नियोनेटोलॉजी इकाई की ओर से डॉक्टर्स लाउंज में हाई-रिस्क फॉलो-अप एंड अर्ली इंटरवेंशन विषय पर सीएमई-सह-कार्यशाला में कुलपति ने देश में नवजात मृत्यु दर में व्यापक अंतर का उल्लेख किया। विभिन्न क्षेत्रों में यह दर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 3 से 35 तक है। इस दौरान फॉलो-अप ऑफ हाई-रिस्क नियोनेट्स बाय नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट शीर्षक पुस्तक का विमोचन किया गया। आधुनिक चिकित्सा संकाय के प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता ने उच्च जोखिम वाले नवजात शिशुओं के विकास संबंधी परिणामों में सुधार के लिए समय रहते समस्याओं की पहचान, उचित हस्तक्षेप और नियमित निगरानी के महत्व को रेखांकित किया। बीएचयू अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पुनीत ने कहा कि यद्यपि ये विकार दुर्लभ हैं लेकिन बेहतर उपचार परिणामों के लिए समय पर निदान और प्रारंभिक हस्तक्षेप आवश्यक हैं। आईएमएस के डीन रिसर्च प्रो. मनोज पांडेय ने आनुवंशिक एवं मेटाबॉलिक विकार, विशेषकर दुर्लभ रोगों के निदान और प्रबंधन में आने वाली चुनौतियों के बारे में बताया। इस दौरान नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम, इंडिया के अध्यक्ष डॉ. ललन के. भारती ने पिछले तीन दशकों में नवजात शिशुओं की जीवन रक्षा के क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी दी। बाल रोग विभाग के पूर्व प्रोफेसर एवं नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट के प्रभारी प्रो. अशोक कुमार ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में डॉ. नवीन जैन, प्रो. अंकुर सिंह, डॉ. अनु शर्मा मौजूद रहे।