भदोही में गंगा के जल स्तर में वृद्धि से कोनिया के छेछुआ, भुर्रा, इटहरा और बसगोती मवैया में कटान तेजी से हो रहा है। कटान से किसानों की खेती की जमीनें भरभरा कर गंगा की धारा में बह जा रही हैं। सप्ताहभर में लगभग 50 बीघा उपजाऊ जमीन गंगा में समा चुकी है। अन्नदाता बेबस हैं।
इटहरा निवासी गायत्री देवी सिंह का कहना है कि हम किसानों के लिए इससे बड़ी त्रासदी और क्या हो सकती है कि आंखों के सामने ही जमीन गंगा में विलीन होती जा रही हैं। जब हमारे पास जमीन ही नहीं रहेगी तो खेती कहां करेंगे। हम बेबस और लाचार हैं लेकिन सरकार हमारी समस्याओं के निदान के लिए प्रयास तक नहीं कर रही है।
किसान कमला शंकर मिश्रा कहते है कि महज एक सप्ताह में ही लगभग 60 बीघे कृषि योग्य उपजाऊ जमीन पर गंगा की धारा में प्रवाहित होने लगी है। मवैयाथान सिंह के किसान राजन पाठक, देवी सिंह ने बताया कि एक सप्ताह में ही 40 से 50 बीघे उपजाऊ जमीन गंगा में समा गई। किसान बर्बाद होते जा रहे हैं, लेकिन हमारी समस्याओं को सुनने वाला भी कोई नहीं है। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद उम्मीद जगी थी कि हम किसानों की कटान की समस्याओं का निवारण होगा, लेकिन अब उम्मीद टूटने लगी है।
छेछुआ के ग्राम प्रधान जगदीश सिंह कहते हैं कि छेछुआ और भुर्रा गांव में गंगा कटान एक विभीषिका का रूप ले चुकी है। किसान भूमिहीन होते जा रहे हैं, लेकिन शासन और प्रशासन के स्तर से कटान रोकने के लिए कोई उपाय नहीं किया गया। कोनिया के जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि राजू सिंह का कहना है कि कोनिया में गंगा कटान रोकने के लिए सरकार ठोस कदम उठाए। शुक्रवार को दोपहर बाद गंगा का जल स्तर स्थिर हो गया है। केंद्रीय जल आयोग के सीतामढ़ी मीटर गेज कार्यालय के अनुसार शुक्रवार को दोपहर गंगा का जल स्तर 76.460 मीटर पर पहुंच कर स्थिर हो गया है।