काशी हिंदू विश्वविद्यालय का दीक्षांत भी शताब्दी युग में प्रवेश करने जा रहा है। अपने सौवें बसंत के सफर से अब ये महज एक कदम दूर है। इस साल विश्वविद्यालय का 99वां दीक्षांत समारोह होगा। किसी की उपाधि धारकों से लेकर उस शैक्षणिक संस्थान के लिए दीक्षांत समारोह स्वर्णिम दिवस से कम नहीं होता है।
बीएचयू का पहला दीक्षांत 17 जनवरी, 1919 को आयोजित किया गया था। अब 98 साल बाद इसके ठीक एक दिन पहले 16 जनवरी, 2017 को मनाया जा रहा है। विश्वविद्यालय के सौ साल के इस सफर में कई स्वर्णिम पल आए। कई दीक्षांत समारोह इतिहास में दर्ज हुए। शताब्दी वर्ष में बीते साल 22 जनवरी को हुए शताब्दी दीक्षांत और 25 दिसंबर, 2012 में हुए विशेष दीक्षांत ने अपनी एक अलग छाप रखी है।
कमच्छा स्थित सेंट्रल हिंदू कॉलेज में पहले दीक्षांत समारोह में जहां 34 विद्यार्थियों को दीक्षा दी गई, वहीं वर्तमान में एशिया के सबसे बड़े आवासीय इस विश्वविद्यालय में हर साल 12 हजार से अधिक विद्यार्थी दीक्षित होकर निकल रहे हैं। दूर दूर तक यहां के स्नातक अपनी उपलब्धियों की खुशबू बिखेर रहे हैं।
99वें दीक्षांत समारोह में बीएचयू के पुरातन छात्र भारतरत्न प्रो. सीएनआर राव मुख्य अतिथि हैं। उन्होंने यहाँ से 1953 में एमएससी इन फिजिक्स की डिग्री ली। रोचक बात यह कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में पीजी की पढाई की इच्छा के बावजूद प्रो. राव ने अपने शिक्षक की सलाह पर बीएचयू में प्रवेश लिया। प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार समिति के प्रमुख प्रो. राव तीसरे वैज्ञानिक हैं, जिन्हें भारतरत्न से नवाजा गया। इससे बीएचयू के ही पुरातन छात्र डॉ. जयंत विष्णु नार्लीकर भी 96वें दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि थे।