वाराणसी। सदर इमामबाड़ा लाटसरैया में अंजुमन आबिदिया और 27 अंजुमनों के सहयोग से 72 ताबूत का जुलूस उठाया गया। 21 मोहर्रम पर इमाम हुसैन का गम मनाने के लिए अजादार सदर इमामबाड़े में एकत्र हुए। कर्बला के 72 शहीदों की याद में जब ताबूत उठाए गए तो हर शख्स की आंखें अश्कबार हो उठीं। हजरत अली असगर का ताबूत देखकर महिलाएं जोर-जोर से रो पड़ीं।
रविवार को मुख्य जुलूस लाट सरैया स्थित सदर इमामबाड़े पर उठाया गया। इसमें 72 ताबूत की शबीह जियारत के लिए सजाई गई। ये 72 ताबूत कर्बला के 72 शहीदों की याद में निकाले गए। जुलूस को शामिल रिजवी वजीर नकवी के संयोजन में अंजुमन आबिदिया एवं शहर की 27 अन्य अंजुमनों के सहयोग से उठाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत आबिद अब्बास ने तिलावत-ए-कुरआन से किया। इसके बाद मायल चंदौलवी, गौहर बनारसी, राजी बिस्वानी एवं सलीम बलरामपुरी ने कलाम सुनाए।
इसके बाद मौलाना शब्बीर वारसी ने मजलिस को खिताब किया और कहा कि हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी दुनिया में मिसाल है। मजलिस के बाद अंजुमन जाफरिया दोषीपुर ने नौहा सुनाया। 72 ताबूत का परिचय जिशान आजमी ने अपने अंदाज में करवाया तो लोगों की आंखें पुरनम हो गईं। खास तौर पर हजरत अली असगर के ताबूत पर सभी गमख्वार दिखे। दरगाह में सज्जाद अली गुज्जन मोतवल्ली ने पूर्वांचल के कई जिलों से आए अजादारों का स्वागत किया।
हाजी सैयद फरमान हैदर ने बताया कि आज से ही इमाम जैनुल आबेदीन की शहादत के सिलसिले से मजलिस शुरू हो गई है। 24 और 25 मोहर्रम को ताबूत का जुलूस उठाया जाएगा । कार्यक्रम का अंत मगरिब की नमाज के साथ हुआ।