कला और संगीत की नगरी काशी में रविवार की शाम अस्सी स्थित एक निजी होटल में सांस्कृतिक कार्यक्रम रखा गया। कला प्रकाश के तत्वावधान में आयोजित सांगीतिक कार्यक्रम राग रस अनुभूति में अमेरिका से आए शास्त्रीय गायक समर्थ नागरकर ने अपने भावपूर्ण गायन से श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में समर्थ नागरकर ने शास्त्रीय संगीत की गहन परंपरा का सुंदर निर्वहन करते हुए रागों की सजीव अनुभूति कराई। वे विख्यात गायक पं. उल्हास कशालकर और दिवंगत पं. दिनकर कैंकिनी के वरिष्ठ शिष्य हैं। समर्थ नागरकर ने कार्यक्रम का शुभारंभ राग केदार से किया। विलंबित तिलवाड़ा ताल में जोगी रावला... ख्याल के पश्चात द्रुत एकताल में तुम सुघर चतुर... बंदिश की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। राग सावनी में हे महादेव... विलंबित झपताल व द्रुत आड़ा चौताल की रचना मानत नाही... प्रस्तुत किया। राग बागेश्री में कौन गत भई... मध्यलय तीनताल की बंदिश तथा समापन राग भैरवी में ठुमरी कान्हा कुंवर मोसे करत बरजोरी... से किया, जिसने वातावरण को रस और भाव से भर दिया। तबले पर श्रुतिशील उद्धव एवं हारमोनियम पर मोहित साहनी ने सधी हुई संगत की। नपूरे पर अजय बाजपेई व अंकित ने सहयोग किया। संयोजन डॉ. आशीष जायसवाल ने किया। संचालन डॉ. अनुराधा रतूड़ी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन अशोक कपूर ने किया। कार्यक्रम के पूर्व शशांक नारायण सिंह, अभिजित अग्रवाल आदि मौजूद रहे।