बनारस के क्रांतिकारियों पर शोध कर रहे बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि मणींद्र ने जब फायर झोंका तो पूरा इलाका गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। फायरिंग में जेएन बनर्जी बुरी तरह घायल हो गए और मणींद्र पकड़े गए।
गिरफ्तारी के बाद फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में रखा गया था। बाद में 10 साल की कठोर सजा हुई । जेल के अंदर अमानवीय अत्याचारों के खिलाफ मणींद्र्र नाथ ने 66 दिन के अनशन के बाद 20 जून 1934 को मन्मथ नाथ की गोद में केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ में अपने प्राणों की आहुति दे दी।
आज भी 20 जून को मणींद्र के शहादत दिवस पर उन्हें याद किया जाता है। जेल में उनकी एक प्रतिमा भी लगी है। मगर काशी जहां वे पैदा हुए, पले बढे़ और शिक्षा ग्रहण की, अंग्रेजों से लोहा लिया वहां उन्हें याद नहीं किया जाता। पांडेयघाट के जिस मकान में मणींद्र नाथ ने जन्म लिया था, आज उसे कोई नहीं जानता है। शहीद मणींद्र्र नाथ बनर्जी के पिता का नाम डॉ. तारा चरण बनर्जी था। वह सात भाई थे और सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे।