आजमगढ़ के अहरौला में शारदा सहायक खंड-32 माईनर पर बना पुल के टूटे हुए 33 साल हो चुके है। यह पुल दर्जनों ग्रामसभाओं के को जोड़ता है। मजबूरी में दो दर्जन ग्रामसभाओं के लोग दस किलोमीटर का चक्कर लगाकर अहरौला बाजार तक जाते हैं। पुल टूटने के इतने वर्ष बाद भी न किसी नेता ने और ना ही विभाग ने इसकी सुध ली।
वर्ष 1984 में तीन ग्रामसभाओं बाकरकोल, बिसईपुर, युधिष्ठिरपट्टी के बीच स्थित शारदा सहायक खंड-32 माईनर पर 80 हजार की लागत से पुल का निर्माण कराया गया था। इस पुल के माध्यम से खेमकरनपुर, बाकरकोर, बिसईपुर, सरायअली, दमदियावन, चौबौलिया, करनपुर, छत्तरपट्टी, मड़ना, बसथान सहित दो दर्जन ग्रामसभाओं के लोग सीधे जुड़ गए।
जिससे लोगों को दस किलोमीटर लंबे चक्कर से मुक्ति मिल गई थी और काफी सुविधा हो गई थी। लेकिन पुल बनने एक साल बाद जुलाई 1985 में पानी के दबाव के चलते पुल का एक हिस्सा टूट गया। जिससे पुन: लोग मायूस हो गए। फिर लोगों को पुराने घुमाव वाले रास्ते को चुनना पड़ा और क्षेत्र के लोगों ने घटिया निर्माण का आरोप लगाया था।
जांच कर पुन: निर्माण की मांग की थी। क्षेत्र के बालमुकुंद सिंह, अरूण सिंह ने बताया कि उस दौरान जांच के लिए तत्कालीन राज्यसभा सदस्य वीरभद्र प्रताप सिंह को शिकायती पत्र भेजा गया। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे वीरबहादुर सिंह को जांच के लिए पत्र लिखा।
इस पर 1986 में पुल निर्माण में लगी कार्यदायी संस्था के सभी लोगों के जांच के आदेश दिए। जांच में विभाग के इंजीनियर, जेई, ठेकेदार सहित पूरी टीम दोषी पाई गई और सबको निलंबित कर दिया गया। क्षेत्र के लोगों ने कई बार पुल के पुन: निर्माण की मांग को लेकर लिखित पत्र भेजा।
लेकिन आज तक कुछ नही हुआ।