वाराणसी के भीड़भाड़ में महिलाओं के गले पर झपट्टा मारकर चेन छीनने के बाद चंद सेकेंडों में नजरों के सामने से ओझल हो जाने वाले बाइकर्स गैंग के बदमाशों का तिलिस्म पुलिस नहीं तोड़ पा रही है। चेन छीनने से पहले क्षेत्र की रेकी कर सुरक्षित रास्ते से भागने वाले यह बदमाश पुलिस के अनुसार शामली जिले के रहने वाले हैं।
बीती 16 फरवरी को मंडुवाडीह थाने से चंद कदम की दूरी पर एक महिला की चेन छीन ली गई। 19 फरवरी को लंका थाना क्षेत्र में दो जगह महिलाओं की चेन छीनी गई। 20 फरवरी को मंडुवाडीह क्षेत्र के सरकारीपुरा में वृद्ध महिला की चेन छीनी गई। 21 फरवरी को फिर मंडुवाडीह क्षेत्र की नीलकंठपुरम कॉलोनी में महिला की चेन छीनी गई।
26 फरवरी को बदमाशों ने लंका थाना के सीर में घर के सामने खड़ी युवती की चेन छीन ली। दो मार्च को मंडुवाडीह थाना के मड़ौली में महिला की चेन छीनी गई। तीन मार्च को मंडुवाडीह थाना के हसनपुर में और जैतपुरा क्षेत्र में महिला की चेन छीनी गई। इस बीच एक पखवारे में पुलिस ने चेन छीनने के आरोप में शामली निवासी सरगना सहित तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया लेकिन वारदात में कमी नहीं आई।
एसएसपी ने चेन छीनने वाले बदमाशों की धरपकड़ के लिए 40 पुलिसकर्मियों की विशेष टीम गठित की है। हालांकि टीम अब तक कोई खास सकारात्मक परिणाम नहीं दे पाई है। थानों की पुलिस के साथ ही सनसनीखेज किस्म के ऐसे अपराधों के मामले में प्रभावी कार्रवाई के लिए क्राइम ब्रांच की जिम्मेदारी सुनिश्चित की गई है। इसके बावजूद चेन छीनने वाले बदमाश जिले की पुलिस पर अब तक भारी पड़ते नजर आए।
चेन छीनने की घटनाओं के मामले में पुलिस के बैकफुट पर नजर आने के कई कारण हैं। सबसे अहम बात यह है कि मुखबिर व्यवस्था खत्म सी हो गई है। सर्विलांस पर आधारित पुलिस मोबाइल की लोकेशन व कॉल डिटेल और सीसी कैमरों की फुटेज के सहारे ही तफ्तीश कर रही है। बीट आरक्षी यह जानते ही नहीं हैं कि उनके क्षेत्र के किस घर में किस किस्म का व्यक्ति रह रहा है।
ज्यादातर आरक्षियों का अपने बीट क्षेत्र के लोगों से मेलजोल ही नहीं रहता है। इसी तरह से ज्यादातर हल्का प्रभारी अपने क्षेत्र के टॉप फाइव और टॉप टेन अपराधियों से अनभिज्ञ हैं। थानेदारों को यह पता ही नहीं रहता कि उनके क्षेत्र का कौन सा अभ्यस्त अपराधी कहां है और क्या कर रहा है। हिस्ट्रीशीटरों और अभ्यस्त अपराधियों की नियमित निगरानी नहीं होती है। कुकुरमुत्ते की तरह जगह-जगह खुले ब्वाय हॉस्टल में अपराधी रहते हैं या छात्र रहते हैं, इसका ब्योरा किसी थाने की पुलिस के पास नहीं है।
होटलों, धर्मशालाओं और लाजों में सामान्य लोग आकर ठहरते हैं या अपराधी रुकते हैं, पुलिस कभी गंभीरता से इस बात की तस्दीक ही नहीं करती है। इसके साथ ही चेन छीनने जैसी सूचनाएं मिलने पर पीड़ित और घटनास्थल पर मौजूद लोगों से पुलिस बेरुखी से इतने सवाल करती है कि कई बार लोग कुछ जानते हुए भी चुप रहना ही बेहतर समझते हैं।