वाराणसी। प्रह्लाद घाट की सीढि़यों पर खचाखच भीड़ के बीच खंभे में प्रगट हुए भगवान नरसिंह ने हिरण्याकश्यप का वध कर भक्त प्रह्लाद को मुक्त करा लिया। हर्षध्वनि के बीच यह लीला मध्यरात्रि के समय हुई।
लीला के चौथे दिन नरसिंह भगवान के अवतार और हिरण्याकश्यप के वध का मंचन किया गया। भक्त प्रह्लाद को अनेक दंड देने के बाद भी जब हिरण्याकश्यप उसका बाल बांका न कर सका तो वह खुद उसके बध की योजना में जुट जाता है। हिरण्याकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद को खंभे में बांध कर पूछता है कि बताओ तुम्हारे भगवान कहां हैं। हिरण्याकश्यप तलवार निकालकर भक्त प्रह्लाद से यह सवाल करता है। उसी समय भविष्यवाणी होती है कि भगवान ईंट में भी हैं पत्थर में भी। आकाश से लेकर पृथ्वी तक हर जगह भगवान हैं। उसी समय हिरण्याकश्यप तलवार से खंभे पर प्रहार करता है और नरसिंह भगवान खंभे से ही अवतार ले लेते हैं और अपने जंघे पर रखकर हिरण्याकश्यप को चीर देते हैं। नलिनी उपाध्याय ने नरसिंह भगवान की और शशांक द्विवेदी ने भक्त प्रह्लाद की भूमिका की। दीपू साहनी हिरण्याकश्यप बने थे। अंत में नृसिंह लीला समिति के अध्यक्ष नरायण मिश्र और व्यस्थापक मोहित उपाध्याय ने भगवान की आरती की।