वाराणसी। पूर्वांचल में उद्यमिता है, माहौल है, लेकिन संसाधनों का अभाव है। सरकारी उदासीनता का जबर्दस्त शिकार रहे पूर्वांचल में पिछले 50 सालों से कोई कल कारखाना नहीं लग सका। डीजल रेल इंजन कारखाना की स्थापना के बाद से पूर्वांचल लगभग उद्योग शून्य रहा है। 1965 में चांदपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थापित होने के बाद नए इंडस्ट्रियल एरिया के लिए प्रयास नहीं किए गए। दो स्पेशल इकोनामिक जोन (सेज) भूमि न मिलने के कारण बन नहीं पा रहे हैं। आधारभूत सुविधाओं बिजली, पानी, सड़क, सीवर का घोर अभाव है। इस कारण यहां के उद्यमियों का बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ तथा अन्य प्रदेशों में पलायन हो रहा है।
उद्योग धंधों में पूर्वांचल के पिछड़ने के पीछे उद्यमी तथा निर्यातक कई कारण मानते हैं। उनका मानना है कि भदोही तथा रामनगर में दो सेज की स्थापना का कार्य कई वर्षों से लटका पड़ा है। इसके चलते नए उद्योग नहीं लग पा रहे हैं। बनारस में चांदपुर औद्योगिक क्षेत्र है। फूलपुर के पास करखियांव में एग्रो पार्क है जहां केवल एग्रो संबंधी उद्योग ही लग सकते हैं। उद्यमियों के पास कोई विकल्प नहीं रह गया है। झारखंड तथा बिहार में आधारभूत सुविधाएं मिल रही हैं। साथ ही टैक्स भी कम देना पड़ रहा है। इस वजह से उद्यमियों का वहां पलायन हो रहा है। पूर्वांचल में कानून व्यवस्था की स्थिति भी काफी खराब है। लोग सुरक्षित कैसे रहें, इस बात की चिंता उन्हें हर वक्त रहती है।
उद्योग न लगने के कारण
- राजनीतिक इच्छाशक्ति का घोर अभाव
- जमीन न मिलने से स्थापित नहीं हो पाए दो सेज
- कानून व्यवस्था की बेहद लचर स्थिति
- आधारभूत सुविधाओं का घोर अभाव
उपाय
- उद्यमियों को स्पेशल पैकेज देना चाहिए
- टैक्स वैकेशन, ड्यूटी ड्रा बैक बढ़ना चाहिए
- आधारभूत सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए
- सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम करना होगा
बोले उद्यमी तथा निर्यातक
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राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। पूरा पूर्वांचल नेतृत्वविहीन है। केंद्र सरकार में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। अब तक के नुमाइंदों ने इस दिशा में कोई प्रयास भी नहीं किया। लचर व्यवस्था है। उद्यमियों को किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जा रही है। इस वजह से वे दूसरे राज्यों की ओर रुख कर रहे हैं।
- दीनानाथ झुनझुनवाला, प्रमुख उद्योगपति
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केंद्र और प्रदेश सरकार में समन्वय का अभाव है। अमेरिका तथा यूरोप में निर्यात का मार्केट काफी मंदा है। इस वजह से करों में छूट दी जानी चाहिए ताकि निर्यातक डटे रह सकें। सरकार को उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए समय-समय पर पैकेज भी दिया जाना चाहिए। - नवीन कपूर, अध्यक्ष, पूर्वांचल निर्यातक संघ (यूपिया)
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पूर्वांचल में मैनपावर उपलब्ध है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। जनप्रतिनिधियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। सोनिया गांधी यदि रायबरेली के विषय में सोचती हैं तो अन्य क्यों नहीं? सरकार का भी सहयोग नहीं मिल रहा है। उद्यमी परेशान हैं। वह अपना अस्तित्व बचाने के लिए दूसरे राज्यों का रुख कर रहा हैं। - प्रदीप तुलस्यान, प्रमुख उद्यमी
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इंफ्रास्ट्रक्चर का घोर अभाव है। कानून व्यवस्था की स्थिति काफी लचर है। उद्यमिता एवं क्षमता की कमी नहीं है। उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए कभी कोई पैकेज नहीं दिया जाता। मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे बड़े घराने को यहां उद्योग लगाने के लिए प्रेरित करें। उनसे बातचीत कर बेहतर माहौल तैयार करें। -राजेश भाटिया, महामंत्री, स्माल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
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पूर्वांचल में एम्स की घोषणा हो तो बने बात
वाराणसी। पूर्वांचल में स्वास्थ्य सेवाएं भी बदहाल है। सरकारी अस्पतालों में बेड उपलब्ध हैं लेकिन पर्याप्त मात्रा में दवाएं नहीं मिलतीं। अच्छे डाक्टरों का भी अभाव है। इन सब परिस्थितियों में लोग निजी अस्पताल की शरण में चले जाते हैं। पूरबवासियों की उम्मीद बीएचयू अस्पताल पर टिक जाती है। यहां भी सीमित बेड हैं। यहां आने वाले मरीजों को मुफ्त सुविधाएं नहीं मिल पातीं। बीएचयू को एम्स का दर्जा दिए जाने की मांग कई वर्षों से की जा रही है। कई बार प्रस्ताव भी भेजा गया लेकिन सरकार का ध्यान नहीं गया। आईएमए के सचिव डा. आलोक भारद्वाज का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की नितांत जरूरत है। बीएचयू से पूरे पूर्वांचल की उम्मीद को पूरा नहीं किया जा सकता है। जरूरत है कि यहां एक बड़ा अस्पताल एम्स सरीखा खोला जाए ताकि जनता को लाभ मिल सके।