वाराणसी। प्रतिबंध के बाद भी पंडित दीनदयाल जिला अस्पताल में मरीजों को बाहर से दवा खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है। डाक्टरों को छोडि़ए स्वयं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ऐसा कर रहे हैं। अमर उजाला की टीम जब इसकी पड़ताल के लिए गुरुवार को अस्पताल पहुंची तो वहां हड़कंप मच गया। डाक्टरों ने न सिर्फ दवा लिखने वाली पर्ची छिपा ली बल्कि दुकानदार तक कैमरा देखकर हट-बढ़ गया।
चौबेपुर निवासी विकास कुमार को कई दिनों से कान में दर्द हो रहा था। गुरुवार को वह उपचार के लिए सीएमएस डा. आरएन सिंह की ओपीडी में पहुंचा। सीएमएस ने उसके पर्चे पर कुछ दवाएं लिखीं और बाहर गेट पर के बगल में स्थित दुकान से खरीदने को कहा। एक अन्य मरीज मनोरमा चौबे को भी उसी दुकान से दवा खरीदने के लिए पर्चा दिया गया। ये तो महज बानगी है। अस्पताल की ओपीडी में आने वाले अधिकांश मरीज को उसी दुकान से दवा खरीदने की सलाह दी जाती है। इसकी पड़ताल के लिए अमर उजाला की टीम जब अस्पताल पहुंची और ओपीडी में सीएमएस द्वारा बाहर से दवा खरीदने के लिए पर्ची देते समय फोटो खींची गई तो वहां हड़कंप मच गया। ओपीडी में बैठे अन्य चिकित्सकों ने दवा लिखने के लिए सामने रखे सादे कागज छिपा लिए। छायाकार जब बाहर दवा के दुकानदार के पास पहुंचा तो कैमरा देख वह भी वहां से चला गया।
कोट :-
यह सच है कि बाहर की दवाएं लिखने की मनाही है लेकिन अस्पताल में सभी दवाएं उपलब्ध न होने पर बाजार से दवा खरीदने को कहा जाता है। वैसे दूरदराज के मरीज भी अक्सर बाजार से दवा लिखने को कहते हैं।-डा. आरके सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, पंडित दीनदयाल अस्पताल
इनसेट
दो घंटे ठप रहा ब्लड बैंक में काम
वाराणसी। लहुराबीर स्थित आईएमए के ब्लड बैंक में तैनात मधु पाठक के स्थानांतरण का विरोध करते हुए कुछ कर्मियाें ने गुरुवार को काम ठप कर दिया। इससे मरीजाें के तीमारदाराें को ब्लड और प्लेटलेट्स नहीं मिल पाए। सुबह 11 बजे से एक बजे तक कर्मियाें के विरोध के कारण कार्य प्रभावित रहा। कर्मचारियों ने आईएमए अध्यक्ष और सचिव को भेजे गए पत्र में कहा है कि कुछ लोग कर्मचारियों में फूट डालकर राजनीति कर रहे हैं। इस पर रोक लगनी चाहिए।