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संस्कृत विश्वविद्यालय वाले प्रदेशों के कालेजों को मान्यता नहीं

Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
Varanasi
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वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय उन प्रदेशाें के संस्कृत महाविद्यालयों को मान्यता प्रदान नहीं करेगा जहां संस्कृत विश्वविद्यालय स्थित हैं। ऐसे प्रदेशों के कालेज वहीं के संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध होंगे। यह निर्णय शुक्रवार को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिंदा प्रसाद मिश्र की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। इस दौरान उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में डा. पद्माकर मिश्र (विक्रय अधिकारी) को पदोन्नति देकर उनको निदेशक प्रकाशन नियुक्त किया गया।
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बैठक में विश्वविद्यालय की ओर से जारी विज्ञापन को रद करने और सेवानिवृत्ति की आयु 62 से घटाकर 60 करने के कोर्ट के आदेश पर भी विचार किया गया। पांच संस्कृत महाविद्यालयाें को मान्यता देने और शासनादेश के अनुरूप नई मान्यता से संबंधित आवेदनों पर भी मंथन किया गया। प्रति कुलपति प्रो. यदुनाथ प्रसाद दुबे की अध्यक्षता में पुरानी मान्यता की सूची के निरीक्षण एवं परीक्षण के लिए समिति गठित की गई। यह समिति एक माह के अंदर कुलपति को रिपोर्ट देगी। यह भी तय लिया गया कि उत्तर प्रदेश के बाहर के जिन महाविद्यालयाें ने अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं प्राप्त किया है उनसे शीघ्र पत्राचार किया जाएगा। बैठक में डा. कमलाकांत त्रिपाठी, डा. ओपी केजरीवाल, प्रो. यदुनाथ प्रसाद दुबे आदि उपस्थित थे।
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