वाराणसी। गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए चली रही गंगा तपस्या की कमान अब मातृशक्ति के हाथों में है। ब्रह्मचारी कृष्ण प्रियानंद के अस्पताल जाने के बाद साध्वी पूर्णांबा ने बुधवार को ही जल त्यागते हुए तपस्या की कमान संभाल ली थी। गंगा प्रेमियों का मानना है कि जिस काम में मातृ शक्ति की भागीदारी हो जाती है वह जरूर सफल होता है। अब गंगा प्रेमी दोगुने जोश के साथ मुहिम की सफलता में जुट गए हैं।
जल त्याग कर तपस्या कर रहीं साध्वी पूर्णांबा के गुरुवार की सुबह तपस्थल पर आते ही गंगा प्रेमियों ने हर-हर गंगे के उद्घोष से उनका स्वागत किया। दूर-दूराज से आए गंगा प्रेमी तपस्थल पर दिनभर गंगा भजन करते रहे। साथ ही गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए अभियान जारी रखने का संकल्प लिया। गंगा प्रेमी इस बात से उत्साहित रहे कि अब तपस्या की कमान मातृ शक्ति के हाथ में है। गंगा अभियान से जुड़े डा. राकेश चंद्र पांडेय, यतींद्र नाथ चतुर्वेदी और डा. गिरीश कुमार तिवारी ने कहा कि मातृ शक्ति ने संवेदनहीन बन चुके प्रशासन को आईना दिखा दिया कि सिर्फ पुरुष ही नहीं महिलाएं भी मां गंगा के लिए बलिदान देने से पीछे नहीं हटेंगी। मुहिम में सभी धर्मों की महिलाएं बढ़-चढ़कर शिरकत कर रही हैं। साध्वी पूर्णांबा ने कहा कि तपस्या करते-करते मां गंगा के लिए अगर प्राण छूट गए तो वे खुद को धन्य समझेंगी। कहा, मां गंगा सिर्फ बेटों की ही नहीं बेटियों की भी हैं।