वाराणसी। अपनी फिल्म ‘पीके’ के प्रमोशन के लिए यहां आए मशहूर फिल्म स्टार आमिर खान ने रविवार को दोस्ती का फर्ज अदा किया और टेंपो चालक रामलखन को गले लगाकर उनका स्वागत किया। दो साल पहले ‘थ्री इडियट’ के प्रमोशन के लिए जब आमिर शहर में थे और वेश बदलकर घूम रहे थे तब इसी टेंपो चालक के साथ उन्होंने काशी का नजारा लिया था। इस दौरान अपने रिश्तेदार दीवान साहब के परिवारीजनों से मिलने की भी उन्होंने इच्छा जताई तो शहर में एक दुकान पर कार रोक कर पान खाने का भी लुत्फ उठाया। यह फिल्म 19 दिसंबर को रिलीज होगी।
छावनी क्षेत्र के एक मॉल में दिन के 12:10 बजे पहुंचे आमिर ने पत्रकारों से बातचीत में अपनी फिल्म के किरदार पीके की खूबियों को साझा किया। बताया कि वो दिन भर पान तो चबाता है और कपड़े भी दूसरों के पहनता है। इसीलिए इस फिल्म में जितने कपड़े मैंने पहने हैं, वो किसी न किसी से लिए गए हैं। पीके के शरीर पर कपड़े फिट न बैठने की यही वजह है। फिल्म के बारे में बताया कि बहुत दिलचस्प कहानी है। इससे पहले मॉल में ‘थ्री इडियट’ का भी शो चला और वो सिने दर्शकों के बीच कुछ देर के लिए आए भी। वो अपनी फिल्म के सिलसिले में शाम को दिल्ली रवाना हो गए।
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कोच रखकर सीखी भोजपुरी, अगले साल नहीं बनाएंगे फिल्म
वाराणसी। आमिर खान वर्ष 2015 में कोई फिल्म नहीं बनाएंगे। इस दौरान वो समाज के लिए कुछ क्रिएटिव भूमिका में नजर आ सकते हैं। राजनीति में जाने से उन्होंने तौबा किया। बताया कि फिल्म ‘पीके’ के सभी डायलॉग भोजपुरी में हैं। इस फिल्म को बनाने के लिए कोच रखकर भोजपुरी सीखनी पड़ी। शांति भूषण से उन्होंने भोजपुरी बोलने का तरीका सीखा। इसे उन्होंने अपनी पहली भोजपुरी फिल्म बताया। कुछ लोगों ने टेंपो चालक का नाम लिया कि इतना करीबी दोस्त होने के बावजूद आपने कोच दूसरे को क्यों बनाया। इस पर आमिर मुस्कुराते हुए बोले, फिर ऐसा मौका आया तो देखा जाएगा।
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राम लखन जी कहां हैं? प्लीज उन्हें बुला दें
वाराणसी। आमिर खान ने फिल्म के प्रमोशन के लिए हाल में आते ही पत्रकारों से देरी के लिए पहले विनम्रता से वजहें गिनाईं और फिर पूछा कि रामलखन जी यहां आए हैं क्या? किसी ने बताया हां, कहीं बाहर घूम रहे हैं। आमिर ने कहा कि कोई उनको बुलवा दे तो बहुत अच्छा लगेगा। कुछ देर में ही राजघाट के टेंपो चालक रामलखन जब उस हाल में दाखिल हुए, तो उन्हें देखते ही अभिवादन के लिए आमिर कुर्सी से खड़े हो गए। रामलखन ने हाथ मिलाने के लिए बढ़ाया लेकिन आमिर ने उन्हें गले लगा लिया। रामलखन के जिस बेटे की शादी में आमिर खुशी बांटने आए थे, उसका भी हाल पूछा। बोले, बेटा कैसा है? इस दौरान आमिर से उनका रिश्ता पूछा गया तो रामलखन सीना फुलाकर बोले, ये मेरे ईश्वर हैं...। तेलियाने के अपने रिश्तेदार दीवान साहब के इंतकाल और उनके घर की गरीबी का हाल जानकर उनके बेटे का फोन नंबर भी आमिर ने मांगा। दीवान साहब के परिवारीजनों से मिलने की उन्होंने इच्छा भी जताई।
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कहा, भ्रष्टाचार मुक्त और स्वच्छ समाज बनाएं
वाराणसी। स्वच्छता के बारे में भी आमिर खान ने बहुत स्पष्टता से अपने विचार रखे। कहा कि स्वच्छता से बहुत चीजें सुधर जाएंगी। इस अभियान से संगीतकारों, कलाकारों, लेखकों को जुड़कर सकारात्मक कदम उठाना चाहिए। अपनी जापान यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वहां लोग बख्शीस नहीं लेते। वैसा ही भ्रष्टाचार मुक्त और स्वच्छ समाज हमें भी बनाना चाहिए। कहा कि अभी तो समय कम है लेकिन कुछ दिनों बाद पीएम के गोद लिए गांव जयापुर भी जाऊंगा। गंगा निर्मलीकरण और काशी के लिए कुछ करने की अपनी योजना को वो टाल गए। अलबत्ता हरदोई के अपने पैतृक गांव शाहाबाद को विकास के लिए गोद लेने का संकेत जरूर दिया। कुछ देर के लिए आमिर कार से शहर में घूमने निकले। उन्होंने मिंट हाउस में कृष्णा की दुकान पर कार रोकी तो प्रशंसकों की भीड़ लग गई। हाथ हिलाकर चाहने वालों का अभिवादन किया। कृष्णा के हाथ का पान उन्होंने अपने किरदान पीके के ही अंदाज में मुंह में दबाया। बताया कि पीके इसी तरह दिन भर पान चबाता रहता है। बनारसी पान से अपने पुराने शौक को भी उन्होंने साझा किया। बताया कि बचपन में मम्मी अब्बा के लिए पान लगाती थीं, तभी से मैंने भी पान लगाना सीख लिया था।